बड़ा और छोटा तालाब के 50 मीटर दायरे में अवैध निर्माण हटाने के आदेश, 3 महीने की तय हुई समयसीमा
एनजीटी ने भोपाल के भोज वेटलैंड को बचाने के लिए 50 मीटर के दायरे में अवैध निर्माण 3 महीने में हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नालों पर कैमरे लगाने को कहा गया है।
राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक भोज वेटलैंड यानी बड़े और छोटे तालाब को लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण तथा सीवेज प्रदूषण से सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फुल टैंक लेवल (FTL) अथवा हाई फ्लड लेवल (HFL) से 50 मीटर के दायरे में वर्ष 2017 के बाद किए गए सभी प्रकार के पक्के और कच्चे अवैध निर्माणों को तुरंत चिह्नित कर अगले तीन महीनों के भीतर पूरी तरह हटाया जाए। इसके अलावा तालाबों में गंदा पानी गिराने वाले प्रमुख नालों और सीवेज पंपिंग स्टेशनों पर कड़ी निगरानी के लिए आधुनिक कैमरे व डिजिटल फ्लो मीटर लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
📹 हर बड़े नाले के मुहाने पर लगेंगे कैमरे और फ्लो मीटर, बड़ा-छोटा तालाब में 'जीरो डिस्चार्ज' का लक्ष्य
तालाबों में मिलने वाले सीवेज की वास्तविक स्थिति पर पैनी नजर रखने के लिए सभी प्रमुख नालों के आउटफॉल और पंपिंग स्टेशनों पर पीटीजेड कैमरे और डिजिटल फ्लो मीटर स्थापित किए जाएंगे। इनसे मिलने वाले पानी के आंकड़ों का छेड़छाड़-रहित रिकॉर्ड तैयार होगा, जिसकी नियमित रूप से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जांच की जाएगी। एनजीटी ने आदेश दिया है कि तालाबों में बिना उपचारित सीवेज का एक बूंद भी प्रवाह न जाए, जिसे 'जीरो डिस्चार्ज' का लक्ष्य मानते हुए सभी नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की तरफ मोड़ा जाए। इस संबंध में मध्यप्रदेश वेटलैंड प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर अपनी एक्शन रिपोर्ट सौंपनी होगी।
🚁 ड्रोन से होगा वेटलैंड का सीमांकन, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी
वेटलैंड की सही और सटीक सीमा तय करने के लिए सितंबर माह में फुल टैंक लेवल प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उच्च क्षमता वाले ड्रोन कैमरों की मदद से सर्वे कराया जाएगा, जिसका सत्यापन याचिकाकर्ता की मौजूदगी में होगा। अधिकरण ने यह भी चेतावनी दी है कि वेटलैंड नियमों या पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर अब सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा मिलने पर अधिकारियों की मिलीभगत मानी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब 29 सितंबर 2026 को होगी, जबकि सभी संबंधित विभागों को छह सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना होगा।
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