श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन में जन्माष्टमी की भव्य तैयारी, नीले रंग के मखमली वस्त्रों से होगा श्रृंगार
उज्जैन के प्रसिद्ध सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा के लिए विशेष नीले रंग के वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की पावन शिक्षा स्थली के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध उज्जैन का ऐतिहासिक गुरु सांदीपनि आश्रम इस बार जन्माष्टमी के महापर्व पर एक बार फिर गहरी आस्था और भक्ति के रंगों से सराबोर होने जा रहा है। आगामी 4 सितंबर को पड़ने वाले जन्माष्टमी पर्व को लेकर आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान के अलौकिक श्रृंगार की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस विशेष अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम, मित्र सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए एक जैसी नीले रंग की थीम पर आधारित विशेष मखमली वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं, जो इस बार के आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगे।
📚 64 कलाओं और 14 विद्याओं की भूमि, चार महीने पहले से शुरू हो जाती है वस्त्रों की अनूठी तैयारी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के इसी सांदीपनि आश्रम में रहकर मात्र 64 दिनों में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। उनके साथ बलराम और सुदामा ने भी यहीं अपनी शिक्षा पूरी की थी, जिसके कारण इस धार्मिक स्थल का महत्व और भी बढ़ जाता है। आश्रम के पुजारी परिवार के पंडित कीर्ति रूपम व्यास ने जानकारी दी कि जन्माष्टमी पर भगवान के लिए वस्त्र तैयार करने का यह पवित्र कार्य कोई एक-दो हफ्ते का नहीं, बल्कि करीब चार महीने पहले से शुरू हो जाता है, जिसमें कपड़े की गुणवत्ता, रंग और बारीक कारीगरी का बहुत सूक्ष्मता से चयन किया जाता है।
🧵 जयपुर, कोलकाता और सूरत से मंगवाया गया विशेष सामान, लड्डू गोपाल के लिए बनेगी सफेद-गुलाबी पोशाक
भगवान के इन अलौकिक वस्त्रों को तैयार करने के लिए देश के कई बड़े शहरों से सामग्री मंगाई जाती है। इस बार सूरत, जयपुर और कोलकाता से खास तौर पर मखमली कपड़ा, रेशमी धागे और जड़ाऊ मोती मंगवाए गए हैं, जिनसे कपड़ों पर आकर्षक नक्काशी की जा रही है। श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा के लिए नीले वस्त्रों के अलावा, पालने में विराजमान होने वाले प्यारे लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग की सुंदर पोशाक तैयार की जा रही है जिसे मोतियों से सजाया गया है। 3 सितंबर तक सभी निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे ताकि 4 सितंबर की मध्य रात्रि जन्मोत्सव पर भगवान का यह भव्य रूप भक्तों को मंत्रमुग्ध कर सके।
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