जेल से वकालतनामे भेजने वाले अतिथि शिक्षक की बड़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जेल से वकालतनामे पहुँचाने वाले अतिथि शिक्षक की भूमिका पर जांच के आदेश दिए हैं। मामले में तत्कालीन जेल अधीक्षक और बार काउंसिल भी घेरे में हैं।

Sep 02, 2026 - 12:39
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जेल से वकालतनामे भेजने वाले अतिथि शिक्षक की बड़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में वकालतनामे के दुरुपयोग से जुड़े एक सनसनीखेज मामले ने न्याय जगत में हलचल मचा दी है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अविन्द्र कुमार सिंह की डबल बेंच ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए एक अतिथि शिक्षक नीरज कुमार साकेत की संलिप्तता की गहन जांच के आदेश जारी किए हैं। अदालत के सामने गंभीर आरोप आए थे कि यह अतिथि शिक्षक जेल में बंद विचाराधीन व सजायाफ्ता आरोपियों से वकालतनामे हासिल करके उन्हें एक विशेष अधिवक्ता राम प्रकाश यादव तक पहुँचाता था, जिन्हें बाद में अदालती रिकॉर्ड में गलत तरीके से पेश किया जाता था।

📑 रीवा सेंट्रल जेल से जुड़े हैं 30 से अधिक संदिग्ध वकालतनामे, अधिवक्ता राम प्रकाश यादव से जुड़े हैं मामले

अदालत के संज्ञान में यह बात आई कि सुनवाई के दौरान अचानक से अधिवक्ता बदलने के कई आवेदन और नए वकालतनामे रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर मामले रीवा केंद्रीय जेल से संबंधित थे। कोर्ट के सामने यह संख्या 30 से भी अधिक पाई गई। जब इस पर अधिवक्ता राम प्रकाश यादव से पूछताछ की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी वकालतनामे उन्हें नीरज कुमार साकेत के माध्यम से प्राप्त होते थे। जब इस तथाकथित मध्यस्थ की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया कि नीरज कुमार साकेत कोई वकील नहीं है, बल्कि वह शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बरेला, थाना सिरमौर (रीवा) में अंग्रेजी विषय का ग्रेड-II अतिथि व्याख्याता (टीचर) के रूप में सरकारी सेवा में कार्यरत है।

🔍 तीन स्तरों पर होगी ताबड़तोड़ जांच, स्कूल शिक्षा विभाग, जेल अधीक्षक और महाधिवक्ता को दिए गए निर्देश

हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को वकालत के पवित्र पेशे में 'टाउटिज्म' (बिचौलियागिरी) और अदालत में झूठे शपथपत्र दाखिल करने का गंभीर मामला मानते हुए तीन अलग-अलग स्तरों पर जांच के कड़े निर्देश दिए हैं:

  • स्कूल शिक्षा विभाग: अतिथि शिक्षक नीरज कुमार साकेत के इस संदिग्ध और गैर-व्यावसायिक आचरण की विभागीय जांच कर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।

  • जेल प्रशासन: रीवा केंद्रीय जेल के तत्कालीन अधीक्षक की भूमिका की भी जाँच होगी कि आखिर जेल की चारदीवारी के भीतर से बिना वैध सत्यापन के इतने सारे वकालतनामे बाहर कैसे और किसकी मिलीभगत से भेजे गए।

  • स्टेट बार काउंसिल और महाधिवक्ता: चूंकि वर्तमान में मध्य प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव प्रक्रियाधीन हैं, इसलिए अदालत ने निर्देश दिया है कि बार काउंसिल के अध्यक्ष की वैधानिक जिम्मेदारी संभाल रहे महाधिवक्ता स्वयं इस मामले की जाँच करें और टाउटिज्म पर रोक लगाने के लिए कदम उठाएं।

सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को अपने स्तर पर विस्तृत जाँच पूरी कर आगामी 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इस बहुचर्चित मामले की अगली आगामी सुनवाई अब 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

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