150 साल पुरानी दुकानें और स्थानीय कारीगर, उज्जैन में तैयार होती है 80 प्रतिशत कान्हा की सामग्री
उज्जैन के गोपाल मंदिर क्षेत्र में राधा-कृष्ण के श्रृंगार और पोशाक का बड़ा बाजार है। यहाँ 30 से अधिक व्यापारी परिवार और कारीगर मिलकर सालाना 10 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर रहे हैं।
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में भगवान की भक्ति केवल मंदिरों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर क्षेत्र की तंग गलियों में राधा-कृष्ण के श्रृंगार का एक विशाल और जीवंत बाजार सजता है। यहाँ भगवान की पोशाक, मुकुट, आभूषण, तुलसी माला, बांसुरी, झूले, पगड़ी, मोर पंख और सिंहासन से लेकर श्रृंगार की हर छोटी-बड़ी सामग्री आसानी से मिल जाती है। यह कारोबार केवल खरीद-फروش का जरिया नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर और स्वरोजगार का एक मजबूत आधार बना हुआ है। इस व्यापार से 30 से अधिक व्यापारी परिवार और 40 से 50 कुशल कारीगर प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
🧵 80 प्रतिशत सामग्री उज्जैन में ही होती है तैयार, वोकल फॉर लोकल को मिल रहा बढ़ावा
द्वारकाधीश गोपाल मंदिर व्यापारी संगठन के अध्यक्ष राकेश सिंह परमार के अनुसार, इस क्षेत्र में बिकने वाली राधा-कृष्ण की पोशाक और श्रृंगार सामग्री का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय स्तर पर ही तैयार किया जाता है। जो कच्चा माल यहाँ उपलब्ध नहीं होता, उसे मथुरा, वृंदावन और इंदौर से मंगवाया जाता है। इसके बाद स्थानीय कारीगर अपनी कला से उन्हें सुंदर पोशाक और आभूषणों का रूप देते हैं। 'वोकल फॉर लोकल' की सोच को अपनाते हुए यहाँ के व्यापारी और कारीगर अपनी मेहनत से स्वरोजगार के नए आयाम गढ़ रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बल मिल रहा है।
🏛️ 150 साल पुरानी विरासत से लेकर हर बजट में उपलब्ध है कान्हा का श्रृंगार
गोपाल मंदिर के बाहर स्थित 150 साल पुरानी 'गणपति मेहंदी' जैसी ऐतिहासिक दुकानें इस बाजार की पुरानी परंपरा की गवाही देती हैं। यहाँ 10 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक की रेंज में हर साइज और बजट की सामग्री उपलब्ध है। सामान्य दिनों में जहाँ व्यापारियों की अच्छी-खासी ग्राहकी होती है, वहीं जन्माष्टमी और अन्य विशेष पर्वों पर कारोबार कई गुना बढ़ जाता है। वेलवेट, साटन और सूती कपड़ों से तैयार होने वाली इन पोशाकों और कलात्मक वस्तुओं को खरीदने के लिए न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
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