लोकायुक्त के निर्देश पर बनी जांच समिति की रिपोर्ट में खामियां, नहीं तय की गई अधिकारियों की जिम्मेदारी
भोपाल में जीआईएस के दौरान लगाए गए फाउंटेन घोटाले की जांच रिपोर्ट पर नगरीय प्रशासन विभाग ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों और आर्थिक क्षति का जिक्र नहीं है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के दौरान शहर में लगाए गए फाउंटेन के कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम की जांच समिति ने स्वीकृत कार्य के मुकाबले जमीनी कमियां तो अपनी रिपोर्ट में दर्ज कर दीं, लेकिन इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के नाम का उल्लेख नहीं किया और न ही सरकारी खजाने को हुई आर्थिक क्षति (Financial Loss) का कोई हिसाब लगाया। विभाग ने अब इस अधूरी रिपोर्ट पर निगम से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है।
🔍 लोकायुक्त के निर्देश पर बनी थी नई समिति, रिपोर्ट के निष्कर्षों पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
इस पूरे मामले की शुरुआत जीआईएस के दौरान लगे फाउंटेन घोटाले को लेकर अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग और प्रभारी कार्यपालन यंत्री आर.के. त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में की गई शिकायत से हुई थी। पहली जांच को लोकायुक्त द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद संचालनालय ने 1 अप्रैल को नए सिरे से जांच के लिए समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष बिंदु क्रमांक 5 में खुद इस बात का जिक्र किया है कि इस तथ्यात्मक प्रतिवेदन पर नगर निगम भोपाल का प्रतिउत्तर प्राप्त किया जाना अभी प्रस्तावित है। यानी निगम का पक्ष जाने बिना ही रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई, जिसे लेकर अब प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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