सेबी की हरी झंडी के बाद आने वाले हैं जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के मेगा आईपीओ, निवेशकों में हलचल

सेबी ने जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के मेगा आईपीओ को मंजूरी दे दी है। जानिए इन बड़े आईपीओ से निवेशकों को कितनी उम्मीद रखनी चाहिए और क्या है एक्सपर्ट्स की राय।

Sep 08, 2026 - 16:58
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सेबी की हरी झंडी के बाद आने वाले हैं जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के मेगा आईपीओ, निवेशकों में हलचल

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने देश के दो सबसे बड़े इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को मंजूरी दे दी है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेक इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) शामिल हैं। इन दोनों मेगा इश्यू के बाजार में आने की आहट से निवेशकों के बीच उत्साह का माहौल है। अनुमान है कि एनएसई का प्रस्तावित इश्यू लगभग 30,000 करोड़ रुपये और जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 37,800 करोड़ रुपये का होगा, जो भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है। अगर ये दोनों अपने अनुमानित आकार के साथ उतरते हैं, तो यह हुंडई मोटर इंडिया के 27,858 करोड़ रुपये के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देंगे।

📊 पुराने मेगा आईपीओ का मिला-जुला इतिहास और निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की खास सलाह

जब भी कोई बड़ा आईपीओ आता है, तो निवेशकों को भारी मुनाफे की उम्मीद होती है, लेकिन इतिहास बताता है कि बड़ा साइज हमेशा शानदार लिस्टिंग की गारंटी नहीं होता। कोल इंडिया ने अपने निवेशकों को करीब 18.78 फीसदी का मुनाफा दिया था, जबकि हुंडई मोटर इंडिया, एलआईसी और पेटीएम जैसे बड़े आईपीओ की लिस्टिंग नुकसान के साथ हुई थी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो और एनएसई के आईपीओ का प्रदर्शन उनकी प्राइसिंग और संस्थागत निवेशकों के कोटे पर निर्भर करेगा। एसबीआईकैप्स सिक्योरिटीज के सनी अग्रवाल और स्वतंत्र विशेषज्ञ दीपक जसानी की सलाह है कि बड़े आईपीओ में निवेशकों को केवल लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने के बजाय लंबी अवधि (Long-term) का नजरिया रखना चाहिए, क्योंकि बड़े इश्यू में बाजार में शेयरों की सप्लाई अधिक होने के कारण शुरुआती रिटर्न सीमित हो सकते हैं।

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