कटनी के सिमको मैनेजर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा, सागर की जगह जबलपुर लैब से रिपोर्ट आने पर उठा विवाद
जबलपुर हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में गलत एफएसएल रिपोर्ट जारी करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। गृह विभाग के एसीएस को 7 दिन के भीतर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश के एक सनसनीखेज हत्या मामले में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की बड़ी लापरवाही सामने आने पर जबलपुर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने जांच के लिए शव के सैंपल एफएसएल सागर भेजे थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसकी जांच रिपोर्ट जबलपुर एफएसएल द्वारा तैयार कर दी गई। इस गंभीर त्रुटि को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गलत रिपोर्ट जारी करने के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगामी 7 दिनों के भीतर सख्त कार्रवाई की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को निर्धारित की गई है।
🔍 क्या है कटनी का सिमको मैनेजर हत्याकांड मामला, एसीएस ने हलफनामा पेश कर स्वीकार की गलती
मामले के अनुसार, कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र के कछगवां स्थित सिमको कंपनी के मैनेजर समनू प्रसाद विश्वकर्मा की हत्या के मामले में जिला न्यायालय ने 16 दिसंबर 2025 को एक महिला सहित पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने रिकॉर्ड खंगालने पर पाया कि खोपड़ी का सैंपल सागर भेजा गया था जबकि रिपोर्ट जबलपुर से बनी। अदालत द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर एसीएस होम की तरफ से हलफनामा पेश कर इस गलती को स्वीकार कर लिया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो एसीएस होम को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
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