ग्वालियर चंबल में 45 साल पुराने डकैती एक्ट को हाईकोर्ट में चुनौती, डीजीपी और 6 जिलों के एसपी को नोटिस

ग्वालियर हाईकोर्ट में 45 साल पुराने डकैती अधिनियम को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने डीजीपी और 6 जिलों के एसपी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

Sep 09, 2026 - 16:15
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ग्वालियर चंबल में 45 साल पुराने डकैती एक्ट को हाईकोर्ट में चुनौती, डीजीपी और 6 जिलों के एसपी को नोटिस

मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह द्वारा ग्वालियर-चंबल अंचल में लागू 45 साल पुराने डकैती अधिनियम को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में चुनौती दी गई है। इस जनहित याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के डीजीपी, गृह विभाग के सचिव के साथ-साथ ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया और शिवपुरी सहित 6 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को कारण बताओ नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर जवाब तलब किया है।

📜 'जब प्रदेश में कोई सूचीबद्ध डकैत ही नहीं, तो फिर इस कठोर अधिनियम के तहत क्यों दर्ज हो रहे हैं मामले?'

याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा के माध्यम से अदालत में दलील दी गई कि जब सरकार खुद विधानसभा में यह स्वीकार कर चुकी है कि मध्य प्रदेश में अब कोई भी सूचीबद्ध डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है, तो फिर डकैती अधिनियम 1981 का औचित्य समाप्त हो चुका है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस मामूली आपसी रंजिश और छोटे-मोटे विवादों में भी ग्रामीणों और किसानों पर इस अधिनियम की गंभीर धाराएं लगा रही है, जिससे अग्रिम जमानत पर रोक जैसी समस्याओं का सामना आम जनता को करना पड़ता है। बीते 5 वर्षों में अंचल के इन 6 जिलों में एक हजार से अधिक एफआईआर इस एक्ट के तहत दर्ज होने का हवाला देते हुए इसे मौलिक अधिकारों का हनन बताया गया है।

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