दतिया में मिला शाहजहां का मुमताज के नाम लिखा 4 इंच का दुर्लभ पत्र, सोने की डस्ट से है खास
ज्ञान भारतम मिशन के तहत दतिया में मुगल शासक शाहजहां का मुमताज के लिए लिखा 4x4 इंच का दुर्लभ फारसी पत्र मिला है। इसके साथ अकबर और नूरजहां के पत्र भी मिले हैं। पूरी खबर पढ़ें।
भोपाल। पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल बनवाने वाले मुगल शासक शाहजहां का फारसी में लिखा छोटे आकार का पत्र (चार गुना चार इंच) मिला है। इसमें उन्होंने लिखा था- "मेरे महबूब के चेहरे पर जो यह सुंदर तिल है, यह उसकी खूबसूरती को बयां करने वाला दूसरा सबसे बड़ा गुण है। उसके रूप और सुंदरता का यह नजारा ऐसा है, मानो कोई कुशल नाविक या कोई बड़ा उस्ताद इस हुस्न की कश्ती को चला रहा हो।"
माना जा रहा है कि शाहजहां ने ये पंक्तियां मुमताज के लिए ही लिखी होंगी। 'ज्ञान भारतम मिशन' के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और सर्वेक्षण के दौरान दतिया पुरातत्व विभाग के पुराविद डॉ. वसीम खान को यहीं के निवासी राधावल्लभ मिश्रा के पास से ऐसे 20 दुर्लभ पत्र मिले हैं। उन्होंने देशभर से ऐसे पुराने पर्चियों की शक्ल के पत्रों और सिक्कों का संग्रहण किया है। इनमें से अधिकतर पत्र आगरा में पुरानी पुस्तकें बेचने वाली दुकानों व अन्य स्थानों से एकत्र किए गए थे। इन पत्रों में अकबर और नूरजहां द्वारा लिखे गए पत्र भी शामिल हैं।
🕊️ कबूतरों के गले में ताबीज में रखकर भेजे जाते थे गोपनीय शाही पत्र
डॉ. वसीम खान का कहना है कि शाही पत्रों को 'बर' प्रजाति के कबूतरों के गले में बेलनाकार ताबीज में भरकर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाया जाता था। लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में भी इस तरह के पत्र संरक्षित रखे हैं। इनकी विशेष पहचान यह होती है कि शेरो-शायरी की भाषा में गोपनीय बातें लिखी जाती थीं और सोने का डस्ट (स्वर्ण भस्म) इन पत्रों में लगा रहता था। कुछ पत्र नूरजहां से भी संबंधित हैं, जिनमें स्वर्ण मिश्रित स्याही से मोमबत्ती का सुंदर चित्रण किया गया है।
बता दें कि मुगलकाल में कबूतरों द्वारा पत्र भेजने का काफी प्रचलन था। अबुल फजल द्वारा लिखित 'आइन-ए-अकबरी' में भी इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है। मुगल काल में ही सैय्यद मोहम्मद मूसावी ने 'कबूतरनामा' नाम से पुस्तक लिखी थी।
📜 अकबर की पाती में लिखा था बड़प्पन और सलामती का संदेश
अकबर द्वारा लिखे गए पत्र में लिखा था- "निगारा बर सरत ताज-ए-करम बाद", यानी आपके सिर पर हमेशा कृपा, उदारता और बड़प्पन का ताज सजा रहे। आगे लिखा था- "सरत मन जेर-ए-पायत दम-ब-दम बाद", जिसका मतलब है कि मेरा सिर हमेशा हर पल आपके कदमों (चरणों) में झुका रहे। कुल मिलाकर इस पाती में लिखने वाले ने सामने वाले व्यक्ति के वैभव, सलामती और खुशहाली के लिए बेहद उच्च दर्जे के शब्दों में दुआ दी है।
🌹 शाहजहां की चिट्ठी पर गुलाब और अकबर की पाती पर रहता था चौकोर निशान
चिट्ठियों पर बने प्रतीक चिह्नों के आधार पर यह पहचान की जाती थी कि पत्र किसके द्वारा लिखा गया है। शाहजहां द्वारा लिखी पर्चियों पर गुलाब का फूल बना रहता था, जो उनकी न्यायप्रियता का प्रतीक था। इसी तरह अकबर की चिट्ठियों पर एक चौकोर निशान रहता था, जिसे फारसी में 'उजुक' कहा जाता था। डॉ. वसीम खान के अनुसार, इस प्रकार के प्रतीक चिह्न मुगल राजवंश के बादशाहों और उनकी बेगमों की विशिष्ट पहचान बताते थे।
ये पर्चियां लिखी तो गई थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से भेजी नहीं जा सकीं। इसी कारण ये मुड़ी हुई नहीं हैं और हिलाने पर सोने की डस्ट आज भी साफ दिखती है। फारसी भाषा की 'रम्ज' शैली में इन्हें लिखा गया है, जो संकेत, प्रतीक या इशारे के माध्यम से अभिव्यक्ति की कला होती है। इन पत्रों को फारसी के विशेषज्ञों की मदद से काफी मशक्कत के बाद पढ़ा जा सका। नर्मदापुरम में बॉटनी के प्राध्यापक रहे डॉ. वजाहत शाह, पुरातत्व संचालनालय के कर्मचारी इश्तियाक नूर, झांसी निवासी लतीफ और डॉ. वसीम ने कुछ पत्रों में लिखे शब्दों के भाव को समझा है।
💬 पुरातत्व विभाग का बयान: दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर हैं ये पत्र
विशेषज्ञों के अनुसार, ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत एक से बढ़कर एक दुर्लभ पांडुलिपियां सामने आ रही हैं, जिनमें ये पत्र बेहद महत्वपूर्ण हैं। दतिया में संग्रहित कबूतरों के माध्यम से भेजे जाने वाले ये शाही पत्र इतिहास के दृष्टिकोण से अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)