भोपाल नगर निगम की कारगुजारी: आवासीय में कमर्शियल गतिविधियों पर आंकड़ों में उलझा प्रशासन, 15 सितंबर को SC में सुनवाई
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। 62 हजार संपत्तियों के दावे के बाद SC में 7,951 नोटिस की रिपोर्ट दी गई। पूरी खबर पढ़ें।
भोपाल। आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे कारोबार के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बीच अब उसके अपने ही आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में 5 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद निगम के अधिकारियों ने दावा किया था कि शहर में 62 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां चिह्नित की गई हैं, जहां आवासीय उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इस बड़े आंकड़े के बाद शहर के व्यापारियों में सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर डर का माहौल बन गया था। हालांकि, 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले तैयार किए गए शपथपत्र में निगम ने महज 7,951 मामलों की पहचान कर नियम-11 के तहत नोटिस जारी करने की बात कही है। यानी जिस सर्वे में 62 हजार संपत्तियों का दावा किया गया था, अदालत के समक्ष पेश रिकॉर्ड में उसका बड़ा हिस्सा गायब है।
🔒 नोटिस के बाद कार्रवाई के आंकड़ों में भी दिखा बड़ा अंतर
शपथपत्र में निगम ने 190 परिसरों को अनधिकृत उपयोग के कारण बंद और सील करने की जानकारी दी है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि निगम ने शहर में सिर्फ 7 प्रतिष्ठान ही सील किए थे और 183 प्रतिष्ठानों को व्यवसायियों द्वारा स्वेच्छा से बंद करने के पंचनामे तैयार किए गए थे। शपथपत्र के एक अन्य हिस्से में 170 परिसरों के बंद किए जाने तथा उनमें से 165 को स्वीकृत अधिभोग के अनुरूप पाए जाने पर बहाल करने और केवल 5 को सील रखने का उल्लेख किया गया है।
🏗️ 296 अवैध निर्माण भी रडार पर, लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स पर 3 साल बाद भी एक्शन नहीं
निगम ने आवासीय उपयोग के उल्लंघन के अलावा बिना भवन अनुमति या स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण के 296 मामले भी चिह्नित किए हैं। इनमें धारा 302(1) के तहत 160 और धारा 307(2) के तहत 163 नोटिस जारी किए गए। 124 मामलों में सुनवाई के बाद अंतिम आदेश पारित हुए और 75 मामलों में अवैध निर्माण या अतिक्रमण हटाया गया।
वहीं, अरेरा कॉलोनी स्थित प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठान 'लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स' को नगर निगम ने 2019 में नोटिस जारी किया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने कार्रवाई से पहले 15 दिन का समय दिया था। खास बात यह है कि यह 15 दिन की समय-सीमा करीब तीन साल पहले ही समाप्त हो चुकी है, फिर भी नगर निगम प्रशासन ने इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
📊 जोनवार जारी किए गए नोटिसों का पूरा ब्योरा
जोनवार कार्रवाई के आंकड़े इस प्रकार हैं:
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जोन 1: 280
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जोन 2: 197
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जोन 3: 242
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जोन 4: 234
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जोन 5: 620
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जोन 6: 184
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जोन 7: 348
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जोन 8: 603
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जोन 9: 264
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जोन 10: 456
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जोन 11: 336
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जोन 12: 520
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जोन 13: 619
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जोन 14: 209
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जोन 15: 569
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जोन 16: 415
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जोन 17: 440
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जोन 18: 464
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जोन 19: 362
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जोन 20: 377
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जोन 21: 212
कुल योग: 7,617 (शपथपत्र में दर्ज कुल संख्या: 7,951)
⚠️ दिल्ली हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट सख्त, जर्जर भवनों पर भी मांगी रिपोर्ट
इधर, दिल्ली के सत्य निकेतन में भवन गिरने से 7 लोगों की मौत और 12 के घायल होने की दुखद घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भवनों की सुरक्षा और पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने संबंधित सभी पक्षों से पूर्व के आदेशों के अनुपालन पर शपथपत्र और रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में अब भोपाल नगर निगम को शहर के जर्जर मकानों की स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई की अद्यतन जानकारी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 2:00 बजे होगी।
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