एक ही दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग! जानें स्थापना का शुभ मुहूर्त

14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का अद्भुत संयोग बन रहा है। जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्र दर्शन से जुड़ी जरूरी बातें।

Sep 12, 2026 - 12:08
0
एक ही दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग! जानें स्थापना का शुभ मुहूर्त

आगामी 14 सितंबर से दस दिवसीय गणेशोत्सव की धूम शुरू होने जा रही है। इस बार वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ धार्मिक संयोग बन रहा है, जब हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। चित्रा व स्वाति नक्षत्र, रवियोग, बुद्धादित्य योग और सोम योग के इस अद्भुत संगम में श्रद्धालु अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे।

ज्योतिषविद् डॉ. अरविंद पचौरी ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। इसी तिथि को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।

⏰ गणेश स्थापना एवं पूजा का शुभ मुहूर्त
  • गणेश स्थापना व पूजा मुहूर्त: सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक (कुल अवधि: 2 घंटे 29 मिनट)

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे से

  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर को सुबह 07:44 बजे तक

  • गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी): 25 सितंबर (शुक्रवार)

🔱 'व्रतों की त्रिवेणी' से मिलेगा श्रद्धालुओं को तीन गुना पुण्य फल

ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार, 14 सितंबर को तृतीया और चतुर्थी तिथि के अद्भुत संयोग के कारण हरतालिका तीज को "गणपति तीज" के रूप में भी जाना जाएगा। शास्त्रानुसार तृतीया तिथि भगवान शिव को और चतुर्थी तिथि श्रीगणेश को समर्पित है, इसलिए इस दिन शिव और गणपति का आह्वान एक साथ होगा।

14 सितंबर को सूर्योदय से हरतालिका तीज का संकल्प काल रहेगा और 15 सितंबर को पारण के समय ऋषि पंचमी का स्पर्श होगा। हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और ऋषि पंचमी का यह "त्रिव्रत स्पर्शी" योग श्रद्धालुओं को तीन गुना पुण्य फल प्रदान करेगा। तुला राशि के चंद्रमा का यह ग्रह-गोचर पति-पत्नी के संबंधों में मधुरता लाएगा।

पंडित गौतम के अनुसार, किसी भी पंचांग में 13 तारीख को तीज व्रत करने का उल्लेख नहीं है, फिर भी सोशल मीडिया में असमंजस फैलाया जा रहा है। यह व्रत वर्ष भर में एक बार पड़ने वाला सबसे कठिन निर्जला उपवास माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है, और इसी दिन गणेश पूजा-स्थापना का फल भी प्राप्त होगा, जो पुत्र की आयु वृद्धि में भी सहायक है।

🕉️ गणेश स्थापना की सरल पूजा विधि और चंद्र दर्शन वर्जित होने का कारण

डॉ. अरविंद पचौरी ने बताया कि गणेश स्थापना के लिए प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर अक्षत (चावल) का अष्टदल कमल बनाएं और बप्पा की मूर्ति स्थापित करें। "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करते हुए पंचामृत व शुद्ध जल से अभिषेक करें। प्रभु को सिंदूर, जनेऊ, चंदन और उनकी प्रिय 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करें। अंत में मोदक का भोग लगाकर आरती करें।

गणेश चतुर्थी को "कलंक चतुर्थी" भी कहा जाता है। इस दिन रात्रि में चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने गए हैं, क्योंकि धार्मिक मान्यतानुसार इस रात चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठा कलंक लगने का भय रहता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User