शराब पीकर स्टार्ट नहीं होगी बस! इंदौर में 25 दिसंबर से शुरू होंगी AI सुरक्षा वाली स्मार्ट बसें

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस स्मार्ट बसें शुरू हो रही हैं। इसमें ब्रीथ एनालाइजर, लेन अलार्म और ऑनलाइन टिकटिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं।

Sep 12, 2026 - 10:42
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शराब पीकर स्टार्ट नहीं होगी बस! इंदौर में 25 दिसंबर से शुरू होंगी AI सुरक्षा वाली स्मार्ट बसें

इंदौर। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत चलने वाली बसों में कई अत्याधुनिक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बस शुरू करने से पहले ड्राइवर को अपनी सीट पर लगे 'ब्रीथ एनालाइजर' (Breath Analyzer) में फूंक मारनी होगी। यदि ड्राइवर ने शराब का सेवन कर रखा होगा, तो बस का इंजन स्टार्ट ही नहीं होगा। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए सभी टिकट ऑनलाइन उपलब्ध होंगे।

ड्राइवर को नींद या झपकी आने पर सेंसर तुरंत अलार्म के जरिए सचेत करेगा। यदि बस अचानक अपनी लेन से लहराती है या रूट बदलती है, तो ऑटोमैटिक सुरक्षा सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाएगा। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'यात्री परिवहन विजन समिट' में पुणे की एरो ईगल कंपनी द्वारा तैयार की गई आधुनिक बस को प्रदर्शित किया गया। कंपनी ने संचालन के लिए यह बस रीवा को सौंपी है।

🛡️ बसों में यात्रियों और वाहनों की सुरक्षा के लिए किए गए 6 प्रमुख इंतजाम
  • 80 किमी/घंटा की तय रफ्तार: सुरक्षा के लिहाज से बस की अधिकतम गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इससे अधिक रफ्तार में बस नहीं चलाई जा सकेगी।

  • CCTV कैमरे: यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखने और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बस के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

  • साइबर सुरक्षा: बस के इलेक्ट्रॉनिक और कंट्रोल सिस्टम को हैकिंग से सुरक्षित रखने के लिए 'गेटवे सॉफ्टवेयर' का इस्तेमाल किया गया है।

  • अग्निशमन और फायरप्रूफ डिजाइन: बस के निर्माण में अग्निरोधी (Fire-retardant) प्लाईवुड का प्रयोग हुआ है। मुख्य बैटरी को निचले हिस्से में अलग कंपार्टमेंट में रखा गया है, जिसके ऊपर ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशर लगा है। आग बुझाने के लिए केमिकल और पानी दोनों की व्यवस्था है।

  • ड्राइवर अलर्ट एवं लेन सेंसर: ड्राइवर के आंख झपकाने या बस के लेन से भटकने पर सेंसर एक्टिव होकर अलार्म बजाएगा, जिससे दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा।

  • प्रॉक्सिमिटी और रिवर्स पार्किंग सेंसर: बस के आगे या पीछे 1.5 मीटर के दायरे में कोई अन्य वाहन आते ही ड्राइवर को स्क्रीन और अलार्म से अलर्ट मिलेगा। रिवर्स पार्किंग के लिए भी स्पेशल सेंसर लगाए गए हैं।

📍 इंदौर में पहुंचीं 7 बसें, 25 दिसंबर से 23 प्रमुख रूटों पर संचालन की योजना

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंदौर डिपो में फिलहाल 7 नई बसें पहुंच चुकी हैं। 45-सीटर क्षमता वाली इन बसों का रंगरोगन और मेंटेनेंस का काम तेजी से चल रहा है। योजना के अनुसार, 25 दिसंबर से इंदौर से 23 विभिन्न मार्गों पर यह सेवा शुरू की जाएगी।

AICTSL (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड) के माध्यम से इंदौर से सागर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, नरसिंहपुर, छतरपुर, बीना, नर्मदापुरम और बालाघाट के लिए अंतर्राज्यीय व अंतरज़िला बसें चलाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त खंडवा-शाजापुर, धार-मंदसौर, धार-पचमढ़ी, झाबुआ-भोपाल, खरगोन-नीमच, बुरहानपुर-नीमच, बड़वानी-आगर मालवा, बड़वानी-शाजापुर और बुरहानपुर-रतलाम जैसे प्रमुख मार्गों पर भी बस संचालन प्रस्तावित है।

🛑 समिट में आरामदायक सफर पर मंथन, बाहर ओवरलोडेड बसों में परेशान दिखे यात्री

एक तरफ ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में चल रही समिट में देशभर के विशेषज्ञ सार्वजनिक परिवहन के चार मुख्य सिद्धांतों—रीच (पहुंच), रिलायबिलिटी (विश्वसनीयता), कंफर्ट (सुविधा) और अफोर्डेबिलिटी (किफायत)—पर चर्चा कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, शहर के विजयनगर क्षेत्र में एआईसीटीएसएल की अरबिंदो से विजयनगर जाने वाली नियमित बसों में यात्री ठसाठस भरे नजर आए। कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा और खुली खिड़कियों से आती धूल से लोग परेशान दिखे। इस स्थिति ने शहर में आधुनिक और अधिक क्षमता वाली बसों की तत्काल जरूरत को उजागर किया है।

💡 यात्री परिवहन विजन समिट में विशेषज्ञों द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव
  • EV इंफ्रास्ट्रक्चर: इलेक्ट्रिक बसों के तेजी से संचालन के लिए मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए।

  • अत्याधुनिक बस पोर्ट: पारंपरिक बस स्टैंड्स को हवाई अड्डों की तर्ज पर आधुनिक 'बस पोर्ट' में बदला जाए।

  • मिनी बसें: कम यात्री घनत्व वाले और छोटे रूटों पर मिनी बसों का संचालन किया जाए।

  • गैर-किराया राजस्व (Non-Fare Revenue): बस डिपो का व्यावसायिक उपयोग करके रिटेल और लॉजिस्टिक्स से अतिरिक्त आय अर्जित की जाए।

  • रियल-टाइम पैसेंजर ट्रैकिंग: स्मार्ट टिकटिंग और मोबाइल ऐप के जरिए बसों की लोकेशन और समय की सटीक जानकारी दी जाए।

  • डिजिटल फीडबैक: यात्रियों के लिए पारदर्शी शिकायत निवारण और डिजिटल फीडबैक सिस्टम लागू हो।

  • डिजिटल पास: नियमित यात्रियों के लिए आरक्षित व अनारक्षित पास पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जारी किए जाएं।

📊 मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन का रोडमैप और भविष्य के आंकड़े
  • मौजूदा स्थिति: वर्तमान में राज्य में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें संचालित हो रही हैं।

  • आगामी 6 माह का लक्ष्य: अगले 6 महीनों में 486 नई पीएम ई-बसें और 34 नई इंटरसिटी बसें बेड़े में शामिल की जाएंगी।

  • 2027 का विजन: वर्ष 2027 तक प्रदेश में स्मार्ट बसों की कुल संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है।

  • नए डिपो: वर्तमान में 7 डिपो कार्यरत हैं, जबकि अगले 6 महीनों में 100-100 बसों की क्षमता वाले 9 नए अत्याधुनिक डिपो बनाए जाएंगे।

  • पर्यावरण संरक्षण: इस पहल से प्रतिवर्ष 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में कमी आएगी।

🚌 इंदौर में 3,000 बसों की जरूरत, 2030 तक 169 शहरों में चलेंगी 38 हजार बसें

इंदौर शहर में वर्तमान में केवल 300 बसों का संचालन हो रहा है, जबकि आबादी के हिसाब से शहर को कम से कम 3,000 बसों की आवश्यकता है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में लगभग 87 प्रतिशत बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों (लगभग 11,000 बसें) द्वारा किया जा रहा है, जिसे अगले 4 वर्षों में बढ़ाकर 15,000 करने की योजना है।

प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को पूरी तरह पुनर्जीवित किया जा रहा है। 'पीएम ई-सेवा' और 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत वर्तमान में 10,000 बसें विभिन्न शहरों में संचालित हैं। वर्ष 2030 तक प्रदेश के 169 शहरों में 38 हजार बसें चलाने का लक्ष्य है, जिससे मध्य प्रदेश के 30 प्रतिशत शहरी परिवहन क्षेत्र में पूर्णतः इलेक्ट्रिक और आधुनिक बस सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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