ग्वालियर में लंपी वायरस के नए स्ट्रेन का कहर, एक हफ्ते में दो दर्जन गोवंश की मौत
ग्वालियर में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के नए स्ट्रेन से एक हफ्ते में 23 गोवंश की मौत हुई है। जानिए इसके लक्षण, अंदरूनी अंगों पर असर और दूध के इस्तेमाल की सावधानियां।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में एलएसडी यानी लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) गोवंश के लिए जानलेवा साबित हो रही है। बीते एक हफ्ते में लंपी संक्रमण की वजह से लगभग दो दर्जन (23) गोवंश दम तोड़ चुके हैं। पशुपालन विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद गोशालाओं, सड़कों और डेरियों में गोवंश तेजी से इस खतरनाक वायरस का शिकार बन रहे हैं।
हालात यह हैं कि जिले में रोजाना 20 से 25 गायें संक्रमित हो रही हैं। सड़कों पर घूम रहे संक्रमित आवारा गोवंश लंपी वायरस के कारण तड़पने को मजबूर हैं, क्योंकि इस बार वायरस का नया स्ट्रेन केवल त्वचा तक सीमित न रहकर गोवंश के अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
🦠 त्वचा ही नहीं अंदरूनी अंगों पर भी हमला कर रहा नया स्ट्रेन, पशु चिकित्सकों की बढ़ी चिंता
ग्वालियर में गोवंश में फैलता लंपी वायरस पशु चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज का नया म्यूटेशन गोवंश की त्वचा बिगाड़ने के साथ-साथ उन्हें सीधे मौत के मुंह में धकेल रहा है।
लंपी का नया स्ट्रेन पशुओं के फेफड़ों, लिवर और हृदय जैसे अंदरूनी अंगों को सीधे प्रभावित कर रहा है। स्थिति यह है कि शहर की तमाम डेरियों, सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं और गोशालाओं में रह रही गायें भी इस नए स्ट्रेन के संक्रमण की चपेट में आ रही हैं।
🔍 क्या है लंपी स्किन डिजीज (LSD) और कैसे फैलता है इसका संक्रमण?
लंपी स्किन डिजीज (LSD) मुख्य रूप से मवेशियों (विशेषकर गायों और भैंसों) में फैलने वाला एक संक्रामक वायरल इंफेक्शन है। यह बीमारी एक से दूसरे जानवर में सीधे संपर्क या परजीवियों के जरिए तेजी से फैलती है।
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लक्षण: पशु के शरीर पर छोटी-बड़ी गांठें बन जाती हैं, जिससे उन्हें तेज बुखार और अत्यधिक दर्द होता है।
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कारण: यह बीमारी मच्छरों, मक्खियों, टिक्स (चिचड़ी) और खून चूसने वाले जूं जैसे परजीवियों के काटने से फैलती है।
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असर: यह संक्रमण इंसानों में नहीं फैलता, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर पशुओं के लिए बेहद घातक साबित होता है।
💉 नगर निगम का अभियान: रतवाई में आइसोलेशन सेंटर तैयार, 12 हजार से अधिक मवेशियों का हुआ टीकाकरण
लंपी वायरस के नए स्ट्रेन से सोमवार से लेकर अब तक 23 गोवंश की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश मौतें एक स्थानीय गोशाला में संक्रमण फैलने से हुईं।
नगर निगम ग्वालियर की पशु चिकित्सक डॉ. रमा गुप्ता ने बताया, "शहर में मिलने वाले संक्रमित गोवंश को रतवाई स्थित आइसोलेशन सेंटर भेजा जा रहा है, जहां उन्हें स्वस्थ मवेशियों से अलग रखकर उपचार दिया जा रहा है। हालांकि, एलएसडी का कोई सीधा एंटी-वायरल इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन वैक्सीनेशन से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नगर निगम अब तक 12,000 से अधिक गोवंश का टीकाकरण पूरा कर चुका है।"
🥛 नए स्ट्रेन से दुग्ध उत्पादन पर पड़ा भारी असर, दूध का इस्तेमाल उबालकर करने की सलाह
डॉक्टरों के मुताबिक, नए स्ट्रेन का असर मादा गोवंश की दूध देने की क्षमता पर बहुत बुरा पड़ा है। जो गायें संक्रमण से पहले अच्छा दूध दे रही थीं, उन्होंने बीमार होते ही दूध देना पूरी तरह बंद कर दिया है।
दूध की सुरक्षा को लेकर एक्सपर्ट डॉ. अवधेश श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि, "किसी भी जानवर के दूध का सेवन कच्चा नहीं करना चाहिए। यदि दूध को अच्छी तरह उबालकर उपयोग किया जाए, तो वह पूरी तरह सुरक्षित रहता है।" डॉ. गुप्ता ने भी सलाह दी कि आमतौर पर भारतीय घरों में दूध उबालकर ही इस्तेमाल होता है और पैकेज्ड दूध पाश्चराइजेशन प्रक्रिया से गुजरता है, इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। फिर भी यदि घर में पली गाय संक्रमित है, तो पशुचिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
📜 अफ़्रीका से शुरू हुआ लंपी का सफर, जानिए भारत में कब हुई थी इसकी एंट्री
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) में प्रकाशित शोध के अनुसार:
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शुरुआत: लंपी स्किन डिजीज सबसे पहले अफ़्रीका के जांबिया देश में देखा गया था, तब इसे 'स्यूडो-अर्टिकेरिया' (pseudo-urticaria) कहा गया।
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वैश्विक फैलाव: 2012 में यह अफ्रीका से निकलकर रूस, तुर्की और सऊदी अरब तक पहुंचा।
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भारत में आगमन: 2019 में ओडिशा में इसका पहला केस मिला था। 2022 तक यह मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और पंजाब सहित कई राज्यों में महामारी की तरह फैल गया।
📊 2022 में लंपी ने मचाया था तांडव, देश भर में 1.8 लाख से अधिक मवेशियों की हुई थी मौत
संसद में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
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वर्ष 2022 में भारत के 15 राज्यों में लगभग 29 लाख मवेशी इस वायरस से प्रभावित हुए थे।
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वर्ष 2022 में 1,55,366 मवेशियों की जान गई थी, जो 2022-23 में बढ़कर 1,84,447 तक पहुंच गई थी।
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सबसे अधिक मौतें राजस्थान (75,000+) और महाराष्ट्र (24,000+) में हुई थीं। वहीं मध्य प्रदेश में 2022 के दौरान 721 मवेशियों की मौत दर्ज की गई थी।
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