पश्चिम रेलवे की सुस्ती से बंद हुई लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर स्पेशल ट्रेन, अनुमति मिलने में लगे 27 दिन

पश्चिम रेलवे की अनुमति प्रक्रिया में 27 दिन की देरी के कारण लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर स्पेशल ट्रेन बंद हो गई। जानें क्या है पूरा मामला और रेलवे एक्सपर्ट्स की राय।

Sep 12, 2026 - 12:16
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पश्चिम रेलवे की सुस्ती से बंद हुई लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर स्पेशल ट्रेन, अनुमति मिलने में लगे 27 दिन

इंदौर। यात्रियों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने का दावा करने वाले भारतीय रेलवे की ढीली प्रशासनिक प्रक्रिया ही अब यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर स्पेशल ट्रेन सहित कुल सात स्पेशल ट्रेनों के फेरे (अवधि) बढ़ाने का प्रस्ताव नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे (उत्तर पश्चिम रेलवे) ने पश्चिम रेलवे (मुंबई) को भेजा था। हालांकि, इस प्रस्ताव को मंजूरी देने में पश्चिम रेलवे को 27 दिन का लंबा समय लग गया। नतीजा यह हुआ कि तब तक ट्रेन के तय फेरे समाप्त हो गए और ट्रेन का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया।

🗓️ 11 अगस्त को भेजा गया था प्रस्ताव, 7 सितंबर को जागी पश्चिम रेलवे

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने सात स्पेशल ट्रेनों के फेरे आगे बढ़ाने के लिए 11 अगस्त को ही पश्चिम रेलवे से अनापत्ति और अनुमति मांगी थी। लेकिन पश्चिम रेलवे मुख्यालय ने इसकी अनुमति 7 सितंबर को जाकर दी।

इस प्रशासनिक देरी के दौरान श्रीगंगानगर से ट्रेन का संचालन 27 अगस्त को और लक्ष्मीबाईनगर (इंदौर) से 28 अगस्त को बंद हो चुका था। समय पर फेरे न बढ़ाए जाने के कारण ट्रेन को अचानक पटरी से हटाना पड़ा। जब इस गंभीर लापरवाही पर रेलवे अधिकारियों से सवाल किया गया, तो स्थानीय अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बचते नजर आए और पूरा मामला मुंबई स्थित पश्चिम रेलवे मुख्यालय से जुड़ा होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया।

🛤️ दोनों दिशाओं में 13-13 फेरे बढ़ाने का था प्रस्ताव

रेलवे के मूल प्रस्ताव के तहत इन ट्रेनों को नवंबर अंत तक चलाया जाना था:

  • श्रीगंगानगर-लक्ष्मीबाईनगर साप्ताहिक स्पेशल (ट्रेन संख्या 04735): इसे श्रीगंगानगर से प्रत्येक गुरुवार को 26 नवंबर तक बढ़ाने का प्रस्ताव था।

  • लक्ष्मीबाईनगर-श्रीगंगानगर साप्ताहिक स्पेशल (ट्रेन संख्या 04736): इसे लक्ष्मीबाईनगर से प्रत्येक शुक्रवार को 27 नवंबर तक संचालित करने की योजना थी।

अब रेलवे बोर्ड से औपचारिक अनुमति मिलने के बाद ही इस ट्रेन का संचालन दोबारा शुरू हो पाएगा, जिससे यात्रियों को दोबारा बुकिंग और यात्रा के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

📢 रेलवे की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, एक्सपर्ट्स ने जताई नाराजगी

रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने रेलवे की इस लचर कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला और सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए समय रहते फेरे बढ़ाने का आवेदन भेज दिया था। यदि पश्चिम रेलवे ने बिना लापरवाही के समय पर मंजूरी दे दी होती, तो 27 अगस्त के बाद यह ट्रेन एक भी दिन के लिए बंद नहीं होती।

उन्होंने कहा कि यदि ट्रेन लगातार चलती रहती तो त्यौहारों के इस सीजन में यात्रियों को भारी राहत मिलती। अनुमति प्रक्रिया में हुई इस बेवजह देरी का सीधा खामियाजा आम रेल यात्रियों को भुगतना पड़ा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश के अन्य मंडलों से चलने वाली कई स्पेशल ट्रेनों को नियमित (Regularize) कर दिया गया, लेकिन इंदौर से चलने वाली एक भी ट्रेन को नियमित करने में रेलवे ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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