जर्जर भवन में चल रही आंगनवाड़ी, बड़वानी में नए स्कूल की मांग पर मंत्री के बयान से भड़के ग्रामीण
बड़वानी के भामी गांव में जनविश्वास शिविर के दौरान स्कूल भवन की मांग पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि कम बच्चों के लिए 2-3 लाख रुपये खर्च नहीं कर सकते।
बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के भामी गांव में आयोजित 'जनविश्वास अभियान' के शिविर के दौरान ग्रामीणों द्वारा स्कूल भवन को लेकर उठाई गई मांग अब गरमा गई है। कार्यक्रम के दौरान जब ग्रामीणों ने नए स्कूल भवन की मांग रखी, तो जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने बच्चों की कम संख्या का हवाला देते हुए मांग को सिरे से खारिज कर दिया।
मंत्री ने ग्रामीणों से सवाल किया कि "इतने कम बच्चों के लिए दो-तीन लाख रुपये क्यों खर्च किए जाएं?" मंत्री के इस जवाब के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं।
🏛️ सामुदायिक भवन में चल रहा है स्कूल, ग्रामीणों ने रखी थी मरम्मत और नए भवन की मांग
ग्राम भामी में आयोजित शिविर के दौरान ग्रामीणों ने प्रभारी मंत्री के सामने गांव की बदहाल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में प्राथमिक विद्यालय का भवन तो उपलब्ध है, लेकिन माध्यमिक विद्यालय का भवन नहीं होने के कारण बच्चों को सामुदायिक भवन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने वर्षों से जर्जर हो चुके माध्यमिक विद्यालय भवन की मरम्मत कराने या फिर नए भवन का निर्माण कराने का आग्रह किया था। हालांकि, मंत्री ने नए भवन की मांग स्वीकार न करते हुए केवल सामुदायिक भवन का उपयोग जारी रखने की बात कही।
🏚️ 2007 में बना भवन पड़ा जर्जर, उसी परिसर में चल रही आंगनवाड़ी पर मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों के अनुसार, भामी गांव में वर्ष 2007 में माध्यमिक विद्यालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन घटिया निर्माण के कारण कुछ ही वर्षों में भवन जर्जर हो गया। सुरक्षा कारणों से स्कूल को सामुदायिक भवन में स्थानांतरित करना पड़ा।
विडंबना यह है कि जिस जर्जर भवन को स्कूल के लिए असुरक्षित माना गया था, उसी परिसर में फिलहाल आंगनवाड़ी का संचालन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि आंगनवाड़ी भवन की छत पर लगे चद्दर/पतरे पहले भी दो बार तेज हवा में उड़ चुके हैं, जिससे वहां आने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा खतरे में बनी रहती है।
🗣️ "कम बच्चे हैं तो क्या सुरक्षित भवन का अधिकार नहीं?": मंत्री के बयान पर शुरू हुई सियासत
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल और आंगनवाड़ी भवन कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की मूलभूत आवश्यकता है। यदि बच्चों की संख्या कम भी है, तो भी उनकी सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रभारी मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दों पर लगातार राजनीतिक बहस जारी है। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित युवाओं और छात्रों से जुड़े कार्यक्रम को लेकर भी सियासी हलचल तेज है। ऐसे में बड़वानी में मंत्री गौतम टेटवाल की इस टिप्पणी पर आने वाले दिनों में विपक्ष का कड़ा रुख देखने को मिल सकता है।
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