इराक से आए ड्रोन ने सऊदी तेल पाइपलाइन को बनाया निशाना, होर्मुज संकट के बीच बढ़ा खतरा

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। होर्मुज स्ट्रेट संकट और हूती हमलों के बीच कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

Sep 12, 2026 - 17:45
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इराक से आए ड्रोन ने सऊदी तेल पाइपलाइन को बनाया निशाना, होर्मुज संकट के बीच बढ़ा खतरा

सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी बेहद महत्वपूर्ण 'ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन' (East-West Oil Pipeline) को सुरक्षा और एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल उत्पादक इलाकों से कच्चा तेल लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है।

इस पाइपलाइन की सबसे बड़ी रणनीतिक खासियत यह है कि इसके जरिए सऊदी अरब विवादास्पद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से बचकर दुनिया के बाजारों तक सुरक्षित तेल पहुंचाता है। गुरुवार को कई ड्रोन ने इस पाइपलाइन को निशाना बनाया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि सुरक्षा मानकों को देखते हुए संचालन को फिलहाल रोका गया है।

🛰️ सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा आग और धुएं का गुबार, इराक से ड्रोन आने का दावा

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस ड्रोन हमले में पाइपलाइन मार्ग के कई मुख्य पंपिंग स्टेशन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में एक स्टेशन पर आग से बड़ा नुकसान और दूसरे स्थान से घना काला धुआं उठता दिखाई दिया है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये ड्रोन इराक की सीमा की तरफ से आए थे और इस हमले में कुछ लोग घायल भी हुए हैं। पाइपलाइन और स्टेशनों को हुए नुकसान की मरम्मत का काम तेजी से जारी है। सऊदी अरब ने कहा कि इराकी प्रधानमंत्री के विशेष अनुरोध पर वह फिलहाल जवाबी सैन्य हमला नहीं करेगा, ताकि इराक सरकार को अपनी सरजमीं से होने वाले आतंकी हमलों को रोकने का मौका मिल सके। इराक ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

🌊 होर्मुज संकट के बीच क्यों बेहद अहम है ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन?

ईरानी हमलों और तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री तेल की आवाजाही लगभग ठप पड़ी है। ऐसे नाजुक समय में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए लाइफलाइन साबित हो रही थी। जून की शुरुआत तक इस पाइपलाइन के जरिए यानबू बंदरगाह तक तेल भेजना बढ़कर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी पाइपलाइन को ठीक करने की तुलना में क्षतिग्रस्त पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत थोड़ी आसान हो सकती है, लेकिन वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है। इसी बीच सऊदी अरब ने ओपेक (OPEC) को सूचित किया कि उसका कच्चे तेल का उत्पादन पिछले महीने 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

🏝️ यमन के हूती लड़ाकों का मायून द्वीप पर कब्जा, बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग पर बढ़ा खतरा

दूसरी ओर, यमन के हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मायून द्वीप (पेरिम द्वीप) पर अपना पूर्ण नियंत्रण कर लिया है। यह छोटा सा ज्वालामुखीय द्वीप बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) जलडमरूमध्य के ठीक बीच स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और अहम समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है।

हूतियों ने गुरुवार को इससे करीब 80 किमी दूर स्थित मोचा शहर पर भी कब्जा जमाया था। बाब-अल-मंदेब से जहाजों की आवाजाही 2023 के अंत से हूती हमलों के कारण पहले ही करीब 60% तक घट चुकी है। अब इस मुख्य मार्ग पर खतरा बढ़ने से सऊदी अरब को अपने तेल जहाजों की सप्लाई के लिए काफी लंबा और खर्चीला रास्ता अपनाना पड़ सकता है।

📈 अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, दबाव बढ़ाने की रणनीति में जुटा ईरान

इन बहुस्तरीय भौगोलिक और सैन्य घटनाओं के बीच वैश्विक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत इस हफ्ते फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई है। तेल की कीमतों में आए इस उछाल से ईरान को भविष्य की कूटनीतिक वार्ताओं में अतिरिक्त दबाव बनाने की ताकत मिल सकती है।

ईरान ने हूती विद्रोहियों का खुलकर समर्थन किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब से हूती नियंत्रित इलाकों की नाकाबंदी तुरंत खत्म करने और सीधी बातचीत शुरू करने की अपील की है। वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के एक प्रवक्ता ने बयान दिया कि अमेरिका के साथ किसी भी भावी समझौते में यमन मुद्दे को शामिल करना होगा। हालांकि सऊदी अरब ने कहा है कि वह शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा का पूरा अधिकार रखता है।

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