'शिकायत नहीं निवेदन करें'; गुना में सड़क की मांग पर भड़के केंद्रीय मंत्री सिंधिया, 3 करोड़ किए मंजूर
गुना के गुलाबगंज में सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का काफिला रोका। सिंधिया की नाराजगी और विधायक पन्नालाल शाक्य के दावों से सियासत गरमा गई है।
गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले के गुलाबगंज इलाके में डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क को लेकर जमकर सियासत गरमा गई है। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग के बीच जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का काफिला वहां से गुजरा, तो ग्रामीणों ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। ग्रामीणों ने दोटूक अंदाज में कहा कि "अगर सड़क नहीं बनी तो इस बार चुनाव में वोट नहीं मिलेगा।" ग्रामीणों की इस भाषा और तेवर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया खासे नाराज हो गए और उन्होंने मौके पर ही ग्रामीणों को हिदायत दे डाली।
🗣️ "मुझसे इस भाषा में बात न करें, निवेदन करें": सिंधिया ने मंच से 3 करोड़ रुपये की दी स्वीकृति
काफिला रोके जाने और ग्रामीणों की सख्त हिदायत से नाराज सिंधिया ने जवाब देते हुए कहा— "मुझसे आप इस भाषा में बात बिल्कुल न करें। मुझसे शिकायत करने की बजाय केवल निवेदन करें, काम कराना मेरी जिम्मेदारी है।"
हालांकि, इस तीखी बहस के महज आधे घंटे बाद ही सिंधिया ने एक सार्वजनिक मंच से घोषणा करते हुए कैंट चौराहे से गुलाबगंज सड़क निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि विधायक पन्नालाल शाक्य और उन्होंने इस विषय को गंभीरता से लिया है तथा मुख्यमंत्री विशेष निधि से प्राथमिकता के आधार पर इसे पास कराया जाएगा।
🏛️ बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य की अलग ही कहानी: "4 महीने से चल रहा था प्रक्रियात्मक काम"
इस पूरे एक घंटे के राजनीतिक हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक अलग ही पक्ष सामने रखा है।
विधायक पन्नालाल शाक्य ने बताया, "गुलाबगंज की इस सड़क के निर्माण के लिए हम पिछले 4 महीने से प्रयासरत थे। सीएम सचिवालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका था, लेकिन बारिश का मौसम होने के कारण डामरीकरण का काम रुका हुआ था। कुछ लोगों ने बेवजह श्रीमंत (सिंधिया) के सामने नाराजगी जता दी, जबकि हमने मंच पर ही उन्हें स्थिति से अवगत करा दिया था।"
❓ सिंधिया की सियासत के बदले अंदाज पर उठे सवाल: राजनीतिक विश्लेषक बोले— "यह त्वरित रिएक्शन था"
बीजेपी में शामिल होने के बाद से अमूमन शांत और 'लो-प्रोफाइल' रहने वाले सिंधिया के इस तल्ख रवैये को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा छिड़ गई है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश भटनागर का मानना है कि सिंधिया ने बीजेपी में आने के बाद अपनी कार्यशैली में बदलाव किया है। उन्होंने कहा— "यह घटनाक्रम एक तात्कालिक (फौरी) रिएक्शन हो सकता है, लेकिन यह भी ध्यान देना होगा कि जिस सड़क को लेकर जनआक्रोश था, उसकी प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी सिंधिया ने आधे घंटे के भीतर ही दिलवा दी।"
📋 गुना में अधिकारियों पर भी दिखा था सिंधिया का रुख: कलेक्टर-एसपी को दी थी हिदायत
गुना दौरे के दौरान यह सिंधिया के सख्त रवैये का अकेला मामला नहीं था।
इससे पहले जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जब सिंधिया ने स्थानीय लोगों की समस्याओं पर कलेक्टर और एसपी से चर्चा करनी चाही, तो उन्हें बताया गया कि दोनों अधिकारी बाहर गाड़ी में बैठे हैं। इस पर सिंधिया ने तुरंत दोनों अधिकारियों को तलब किया और दोटूक लहजे में कहा था— "आप गाड़ी में मत बैठिए, आप दोनों मेरी ड्यूटी में हैं।" अधिकारियों और जनता दोनों के प्रति सिंधिया के इन सख्त तेवरों से क्षेत्र में प्रशासनिक व राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
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