Chhindwara Jal Jeevan Mission: सरकारी बोरवेल फेल, ग्रामीणों को पीने पड़ रहे दूषित पानी! कलेक्टर से लगाई गुहार
छिंदवाड़ा के कहुआ गांव में 2 साल से गहराया पेयजल संकट। नल-जल योजना ठप होने से महिलाएं 3 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर। कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।
छिंदवाड़ा। जिले की अमरवाड़ा विधानसभा अंतर्गत कहुआ गांव में पिछले दो वर्षों से गहराया पेयजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। गांव में करीब 400 परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहाँ की महिलाएं पीने के पानी के लिए रोजाना 3 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय करने को मजबूर हैं। अपनी इसी पीड़ा को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए गांव की सैकड़ों महिलाएं सिर पर खाली बर्तन रखकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और जनसुनवाई में अपनी समस्या रखी।
🛠️ बोरवेल हैं, पर पंप और तारों का अभाव
ग्रामीण संदीप कुमार धुर्वे ने बताया कि गांव में चार सरकारी बोरवेल तो मौजूद हैं और उनमें पर्याप्त जल स्तर भी है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण वे शो-पीस बने हुए हैं। पीएचई विभाग (PHE) में कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिलता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की खराबी, खराब मोटर और कटे हुए तारों के कारण नल-जल योजना लंबे समय से ठप पड़ी है, जिसकी कीमत ग्रामीणों को अपनी मेहनत और समय से चुकानी पड़ रही है।
⚠️ मानसून से पहले खतरे की घंटी: दूषित पानी का डर
ग्रामीणों ने चेताया है कि मानसून की दस्तक शुरू हो चुकी है। यदि समय रहते नल-जल व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन कुओं का दूषित पानी पीना पड़ेगा। पिछली बार भी दूषित पानी पीने के कारण गांव के कई ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों को तत्काल जांच कर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
📢 चेतावनी: समाधान नहीं तो होगी हड़ताल
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अब भी उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला, तो वे गांव में हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने मांग की है कि केवल नल की पाइपलाइन बिछाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गांव में पानी की एक बड़ी टंकी का निर्माण भी अनिवार्य है ताकि 'जल जीवन मिशन' के तहत ग्रामीणों को सुचारू रूप से पानी मिल सके।
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