Maintenance Case MP: नौकरीपेशा पत्नी को नहीं मिलेगा अंतरिम भरण-पोषण; हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
जबलपुर हाई कोर्ट ने सक्षम पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण की मांग ठुकराई। कोर्ट ने कहा- भरण-पोषण जरूरतमंद के लिए है, न कि संपन्न को लाभ देने के लिए।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance) के एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी करते हुए एक कामकाजी पत्नी की याचिका को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि भरण-पोषण का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद जीवनसाथी को आर्थिक सहायता देना है, न कि समान आर्थिक स्थिति वाले पक्ष को अतिरिक्त लाभ पहुंचाना।
🎭 'मर्चेंट ऑफ वेनिस' से की तुलना
हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए महिला की मांग को शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेंट ऑफ वेनिस' के उस प्रसंग से जोड़ दिया, जिसमें 'एक पाउंड मांस' की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला का यह आवेदन पति से आर्थिक लाभ ऐंठने की एक कोशिश मात्र है, जिसे कानून की दृष्टि में अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा पूर्व में भरण-पोषण खारिज करने के आदेश को पूर्णतः सही ठहराया है।
👩💼 पत्नी खुद है नौकरीपेशा: आय 1 लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पत्नी स्वयं एक कामकाजी महिला है और उसकी मासिक आय एक लाख रुपये से अधिक है। कोर्ट ने रेखांकित किया कि दंपत्ति की कोई संतान नहीं है और पति-पत्नी की आय में ऐसा कोई बड़ा अंतर भी नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि पत्नी आर्थिक रूप से पति पर निर्भर है।
🚫 भरण-पोषण जरूरतमंदों के लिए है
हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का कानून उन लोगों की सुरक्षा के लिए है जो आर्थिक रूप से असहाय हैं। यदि कोई पक्ष पहले से ही आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर है, तो उसे दूसरे पक्ष से भरण-पोषण का दावा करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है।
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