Chhindwara Education News: स्कूल हैं, बच्चे हैं, पर शिक्षक नहीं! हर्रई के 13 सरकारी स्कूल 'भगवान भरोसे'
छिंदवाड़ा के हर्रई ब्लॉक में 13 सरकारी स्कूलों में कोई नियमित शिक्षक नहीं। अटैचमेंट और स्टाफ की कमी से बच्चों का भविष्य अंधकार में। जानें जमीनी हकीकत।
छिंदवाड़ा। एक ओर सरकार शिक्षा के विस्तार का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर छिंदवाड़ा जिले के हर्रई विकासखंड की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहाँ 13 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी नियमित (परमानेंट) शिक्षक पदस्थ नहीं है। शिक्षक न होने के कारण या तो ये स्कूल बंद पड़े हैं, या फिर किसी तरह अतिथि शिक्षकों के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। इसका सीधा नुकसान उन आदिवासी बच्चों को हो रहा है, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने का सपना लेकर स्कूल जाते हैं और खेल-कूदकर खाली हाथ घर लौट आते हैं।
📋 अटैचमेंट की राजनीति: कागज पर पोस्टिंग, शहर में सेवाएं
इस बदहाली का एक बड़ा कारण 'अटैचमेंट' की व्यवस्था है। सरकारी रिकॉर्ड में तो इन ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति दर्शाई जाती है, लेकिन हकीकत में वे या तो शहर के स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं या फिर शिक्षा विभाग के दफ्तरों में अटैच हैं। जिले में ऐसे करीब 40 शिक्षक हैं जिनकी मूल पदस्थापना ग्रामीण अंचलों में है, लेकिन वे अपनी सेवाएं अन्य जगहों पर दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, जुन्नारदेव के बीईओ स्वयं एक प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं, लेकिन वे प्रशासनिक कामकाज देख रहे हैं।
🗣️ ग्रामीणों का दर्द और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
स्थानीय समाज सेवी दुर्गेश चौकसे और कोहपानी के ग्रामीण प्रीतम सिंह का कहना है कि आदिवासी अंचलों में विकास के नाम पर केवल बातें होती हैं। स्कूलों में शिक्षक न होने की वजह से गरीब आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है, क्योंकि वे निजी स्कूलों की महंगी फीस भरने में असमर्थ हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रिक्त पदों पर तत्काल नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए ताकि स्कूलों का संचालन फिर से सुचारू हो सके।
📢 विभाग का रुख
इस गंभीर मामले पर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पीएल मेश्राम ने कहा कि शिक्षकों की कमी की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने दावा किया कि अतिथि शिक्षकों के माध्यम से स्कूलों का संचालन किया जा रहा है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, जमीनी हालात विभागीय दावों से काफी अलग नजर आते हैं।
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