Bhopal News: सरकारी खजाने में हेरफेर और दो सरकारी आवास का अवैध लाभ; शिक्षा विभाग के बाबू पर लगे गंभीर आरोप
भोपाल जिला शिक्षा कार्यालय में 1.55 करोड़ के गबन का मामला। आरोपी लिपिक को ही जांच समिति का सदस्य बनाने पर बवाल। EOW और लोकायुक्त में शिकायत दर्ज।
भोपाल। राजधानी भोपाल का जिला शिक्षा विभाग इन दिनों एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। विभाग के सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी सीजे जायसन पर सरकारी खजाने से 1.55 करोड़ रुपये से अधिक का गबन करने का गंभीर आरोप लगा है। मामला तब और विवादास्पद हो गया जब जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित 7 सदस्यीय जांच समिति में मुख्य आरोपी कर्मचारी को ही बतौर सदस्य शामिल कर लिया गया। इस लापरवाही के बाद अब मामले की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), लोकायुक्त और स्कूल शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों से की गई है।
💸 टेंट और मिठाई के बिलों में बड़ा खेल
शिकायतकर्ता नौशाद अली (फिजिकल फाउंडेशन ऑफ इंडिया) के अनुसार, विभागीय ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त मिली है। जांच में खुलासा हुआ कि जवाहर टेंट हाउस और स्वीट्स के बिलों में भारी हेरफेर की गई। कैश बुक के पन्नों पर एक ही राशि को दो बार प्रविष्ट (Double Entry) कर करीब 1.55 करोड़ रुपये का वित्तीय जाल बुना गया, जिसका कोई वैध हिसाब अब तक नहीं दिया जा सका है।
🏠 दोहरे आवास का अवैध लाभ
आरोपी कर्मचारी पर वित्तीय गबन के अलावा शासकीय पद का दुरुपयोग करने का भी आरोप है। जांच में पाया गया कि सीजे जायसन को पहले से ही एक शासकीय आवास आवंटित था, इसके बावजूद उन्होंने BHEL में एन-3 टाइप का दूसरा आवास भी नियमविरुद्ध अलॉट करवा लिया। उन्होंने लंबे समय तक इन दोनों आवासों पर कब्जा रखा और इनका किराया भी समय पर जमा नहीं किया। संपदा संचालनालय के रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायत होने के बाद ही उन्होंने भारी-भरकम राशि एकमुश्त जमा की।
⚖️ जांच की निष्पक्षता पर सवाल
संयुक्त संचालक लोक शिक्षण द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद विभाग में खलबली मची है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कर्मचारी से फाइलों का चार्ज छीना जाना चाहिए था, उसे ही जांच टीम में बिठा दिया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि चूंकि स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, इसलिए इसकी जांच किसी स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से समयबद्ध तरीके से कराई जाए।
📢 आरोपी का पक्ष
इस पूरे मामले पर आरोपी सीजे जायसन ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता से उनका पुराना विवाद है, जिसके चलते ये आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बिलों पर हस्ताक्षर न होने को पूर्व अधिकारी के कार्यकाल की प्रक्रियात्मक कमी बताया और दो आवास लेने के पीछे एक घर की जर्जर स्थिति का तर्क दिया है। वहीं, संयुक्त संचालक अरविंद चौरघड़े ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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