Students Protest: CBSE टॉपर का दर्द देख भावुक हुए नेता; कांग्रेस ने 'छात्रों की गूंज' अभियान के जरिए सरकार को घेरा

कांग्रेस ने भोपाल में शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान। नीट पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन में धांधली पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग। जानें पूरी खबर।

Jun 26, 2026 - 18:28
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Students Protest: CBSE टॉपर का दर्द देख भावुक हुए नेता; कांग्रेस ने 'छात्रों की गूंज' अभियान के जरिए सरकार को घेरा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस ने 'छात्रों की गूंज' अभियान का आगाज किया है। पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और रिजल्ट में हो रही भारी देरी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर कांग्रेस अब युवाओं के साथ सड़क पर उतर आई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और एनएसयूआई के नेताओं ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।

😭 टॉपर का दर्द: "सीबीएसई ने मेरे भविष्य के साथ खिलवाड़ किया"

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पन्ना जिले के सीबीएसई 10वीं के टॉपर छात्र 'लक्ष्य' का दर्द छलक पड़ा। लक्ष्य ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ सबूत पेश करते हुए आरोप लगाया कि मूल्यांकन में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। सही उत्तर लिखने के बावजूद उसे अंक नहीं दिए गए। लक्ष्य ने बताया कि पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए आवेदन करने के बावजूद उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे वह पिछले डेढ़ महीने से गहरे मानसिक तनाव में है।

📉 सांसद इमरान मसूद का दावा: 89 बार लीक हुए पेपर

सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस वर्षों में देश में 89 बार पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन घोटालों से करीब 6.5 करोड़ युवा और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। मसूद ने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक 'सुनियोजित स्कैम' (सुनियोजित घोटाला) करार दिया है, जिसमें वेंडर एजेंसियों और राजनीतिक संरक्षण की जांच होनी चाहिए।

📋 कांग्रेस की प्रमुख मांगें और समाधान

कांग्रेस ने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार (Overhaul) की मांग करते हुए सरकार के सामने ये सुझाव रखे हैं:

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: नीट मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।

  • उच्च स्तरीय जांच: पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट और वेंडर कॉन्ट्रैक्ट्स की निष्पक्ष जांच हो।

  • निश्चित कैलेंडर: एक वार्षिक परीक्षा और भर्ती कैलेंडर लागू हो, जिसमें परीक्षा की तारीख से लेकर नियुक्ति तक का समय पहले से तय हो।

  • प्रणालीगत सुधार: पूरी परीक्षा व्यवस्था को डिजिटल और फिजिकल स्तर पर पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।

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