AIIMS Bhopal Research: क्या आप जानते हैं डायपर का सही इस्तेमाल? शोध में सामने आई माताओं में जागरूकता की कमी
शिशुओं के लिए डायपर का उपयोग करते समय क्या रखें सावधानी? एम्स भोपाल के हालिया शोध में शहरी और ग्रामीण माताओं के बीच जागरूकता का अंतर सामने आया है।
भोपाल। आधुनिक जीवनशैली में शिशुओं की देखभाल के लिए डायपर एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल बच्चों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के नर्सिंग कॉलेज द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण शोध में यह सामने आया है कि अधिकांश माता-पिता डायपर के सुरक्षित उपयोग और उसके निपटान के प्रति पर्याप्त जागरूक नहीं हैं।
🔍 कैसे हुआ यह शोध?
यह अध्ययन एम्स भोपाल के नर्सिंग कॉलेज की एमएससी नर्सिंग (पेडियाट्रिक नर्सिंग) की छात्रा मीना द्वारा किया गया। इस शोध का मार्गदर्शन प्रोफेसर एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ. ममता वर्मा और सह-मार्गदर्शक सहायक प्राध्यापक कुमारास्वामी एपी ने किया। इस रिसर्च में भोपाल के शहरी और ग्रामीण इलाकों की 276 ऐसी माताओं को शामिल किया गया, जिनके बच्चे 0 से 36 माह की आयु के हैं और डायपर का नियमित उपयोग करते हैं।
⚠️ गलत उपयोग से बढ़ता है संक्रमण का खतरा
शोधकर्ताओं के अनुसार, डायपर का लंबे समय तक इस्तेमाल, उसे सही समय पर न बदलना या स्वच्छता की कमी बच्चों में कई समस्याओं को जन्म दे सकती है। इससे बच्चों की कोमल त्वचा पर चकत्ते (diaper rash), जलन, फंगल इन्फेक्शन और गंभीर जीवाणु (bacteria) संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायपर बदलने की सही आवृत्ति, बच्चे की त्वचा को सूखा रखना और स्वच्छता का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है।
📊 शहरी और ग्रामीण माताओं की तुलना
अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों की माताएं डायपर के उपयोग को लेकर ग्रामीण माताओं की तुलना में अधिक जागरूक पाई गईं। शहरी माताओं में से करीब 40 प्रतिशत को डायपर चुनने और उसे बदलने की सही जानकारी थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्तर काफी कम दर्ज किया गया। हालांकि, दोनों ही क्षेत्रों में 'उपयोग किए गए डायपर के सुरक्षित निपटान' और 'हाथों की स्वच्छता' (Hand Hygiene) को लेकर जानकारी का अभाव समान रूप से देखा गया।
💡 विशेषज्ञों की सलाह: स्वच्छता ही सबसे बड़ा बचाव
डॉ. ममता वर्मा और उनकी टीम का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ डायपर पहनाना ही पर्याप्त नहीं है। माता-पिता को निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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हाथों की सफाई: डायपर बदलने से पहले और बाद में साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।
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त्वचा की देखभाल: बच्चे की त्वचा को हर बार सफाई के बाद पूरी तरह सूखा रखें।
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सुरक्षित निपटान: उपयोग किए गए डायपर को खुले में फेंकने के बजाय उचित तरीके से नष्ट करें ताकि गंदगी न फैले।
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