अभियोजन स्वीकृति के पांच साल बाद भी चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं हुई? हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
जबलपुर हाईकोर्ट ने रायसेन के साइकिल घोटाले में ईओडब्ल्यू के डीजी को तलब किया है। अभियोजन स्वीकृति के 5 साल बाद भी चार्जशीट पेश न करने पर अदालत ने नाराजगी जताई है।
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित रायसेन साइकिल घोटाले में जबलपुर हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ट) की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई है। अभियोजन की स्वीकृति मिलने के पांच साल बाद भी अदालत में चार्जशीट प्रस्तुत नहीं किए जाने के मामले को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने इस मामले में दायर एक अपील की सुनवाई करते हुए ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर जनरल (DG) उपेन्द्र जैन को व्यक्तिगत रूप से अदालत में तलब किया है। कोर्ट की इस सख्त कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
🚲 क्या है रायसेन साइकिल वितरण का मामला, पांच साल तक चार्जशीट दाखिल न होने पर कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
मामले के अनुसार, रायसेन जिले की बरेली तहसील में पदस्थ सहायक शिक्षक सीमा धाकड़ और उमराव धाकड़ ने ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वर्ष 2013 में साइकिल वितरण के लिए आई राशि प्राचार्य द्वारा निकालकर नकद दी गई थी, और उनके खिलाफ दिसंबर 2021 में ही अभियोजन की अनुमति मिल चुकी थी, लेकिन ईओडब्ल्यू ने आज तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि वर्ष 2021 से 2025 तक जांच अधिकारी क्यों सोते रहे और केवल पत्राचार क्यों किया गया? कोर्ट ने कवरिंग और सेंक्शन लेटर की तारीखों में अंतर को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगते हुए डीजी को व्यक्तिगत हलफनामे और उपस्थिति के निर्देश दिए हैं।
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