Tiger Poaching in India: NTCA ने हाई कोर्ट में मानी बड़ी बात; बाघों की मौत के पीछे अवैध शिकार है प्रमुख कारण
बाघों की अप्राकृतिक मौतों पर एनटीसीए ने हाई कोर्ट में स्वीकार किया अवैध शिकार का सच। वन्यजीव संरक्षण और तस्करी पर अब कोर्ट की पैनी नजर।
जबलपुर। देशभर में बाघों की लगातार हो रही अप्राकृतिक मौतों के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण हलफनामा दायर कर यह स्वीकार किया है कि संरक्षित बाघ अभ्यारण्यों के भीतर और आसपास बाघों की मौतों के पीछे 'अवैध शिकार' (Poaching) एक प्रमुख कारण है। यह स्वीकारोक्ति वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में हड़कंप मचाने वाली है।
⚖️ जनहित याचिका पर कोर्ट का कड़ा रुख
यह हलफनामा वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर एक जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता ने बाघ अभ्यारण्यों में हो रही संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बाघों की कई मौतें वास्तव में संगठित गिरोहों द्वारा किए गए शिकार का परिणाम हैं।
⚠️ भारतीय बाघों के अस्तित्व पर खतरा
एनटीसीए ने स्वीकार किया कि देश के बाहर बाघों के अंगों और उनसे बनी उत्पादों की अवैध मांग आज भी भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। प्राधिकरण ने कहा कि अवैध शिकार के नेटवर्क को ध्वस्त करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दिशा में सीबीआई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर समन्वित अभियान चलाए जा रहे हैं।
👁️ हाई कोर्ट की निगरानी में भविष्य की रणनीति
अब हाई कोर्ट की नजर केवल इस स्वीकारोक्ति पर ही नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए घोषित रणनीतियां धरातल पर कितनी प्रभावी हैं। हाई कोर्ट अब यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के लिए केवल कागजी अलर्ट जारी न हों, बल्कि अवैध शिकार और तस्करी के नेटवर्क पर पूर्णतः अंकुश लगे।
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