बड़े तालाब और कलियासोत डैम पर अतिक्रमण की ड्रोन सर्वे रिपोर्ट आज होगी पेश, रसूखदारों में हड़कंप
भोपाल के बड़े तालाब और कलियासोत डैम के अतिक्रमण पर 5 दिनों की ड्रोन सर्वे रिपोर्ट आज NGT में पेश होगी। जानिए किन-किन रसूखदारों के निर्माण आए रडार पर।
भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल की धड़कन माने जाने वाले 'बड़े तालाब' और 'कलियासोत डैम' के किनारों पर किसने कितनी मनमानी और अतिक्रमण किया है, इसकी वास्तविक और असल तस्वीर मंगलवार को साफ हो जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने आज इस पूरे मामले की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट आधिकारिक रूप से पेश होने जा रही है।
ट्रिब्यूनल की कड़ी सख्ती के बाद एक विशेष जांच टीम ने लगातार पांच दिनों तक आधुनिक ड्रोन कैमरों के जरिए इन संवेदनशील इलाकों का चप्पा-चप्पा छाना है।
इस जमीनी पड़ताल (Ground Truthing) में जो नए खुलासे हुए हैं, वे कई रसूखदारों और रसूखदार नेताओं की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। बड़ा तालाब और डैम के जलग्रहण क्षेत्र के दायरे में बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस से लेकर कई नामी रेस्टोरेंट और अवैध निर्माण पसरे हुए मिले हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आज की सुनवाई में एनजीटी इन अवैध कब्जों और निर्माणों को लेकर कोई बड़ा और कड़ा बुलडोजर या बेदखली का आदेश जारी कर सकता है।
💧 भदभदा डैम के गेट अचानक खोलने पर मचा था बड़ा बवाल: एनजीटी के आदेश की अवहेलना का आरोप
इस पूरे सघन सर्वे की पृष्ठभूमि 4 सितंबर की उस घटना से जुड़ी हुई है, जब भदभदा डैम के गेट अचानक खोल दिए गए थे।
दरअसल, एनजीटी ने बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) पर अतिक्रमण की सटीक स्थिति जांचने के लिए जलस्तर को 1666.80 फीट पर मेंटेन रखने का सख्त निर्देश दिया था। लेकिन, जब तालाब का पानी इस तय निशान से महज 0.10 फीट नीचे था, तभी अचानक डैम के गेट खोल दिए गए, जिस पर पर्यावरणविदों और नागरिकों ने काफी विवाद खड़ा किया था।
🛸 पांच दिन चला सघन ड्रोन अभियान: खानूगांव से बैरागढ़ तक नापा गया अतिक्रमण
गेट विवाद के ठीक अगले दिन यानी 5 सितंबर से ही एनजीटी द्वारा गठित विशेष टीम पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई। टीम ने 9 सितंबर तक लगातार भदभदा डैम और सैर-सपाटा सहित कई अहम लोकेशंस पर जाकर बारीकी से मुआयना और नाप-जोख की।
जांच टीम ने खानूगांव में बन रही क्रूज साइट, आर्मी स्पोर्ट्स एरिया, कोहेफिजा, हलालपुरा स्थित फिजा फार्म, लैंडमार्क मैरिज गार्डन के पिछले हिस्से, चिरायु अस्पताल के आसपास के क्षेत्र, भौंरी, खजूरी सड़क, कोलूखेड़ी और बैरागढ़ जैसे संवेदनशील इलाकों में जाकर सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग के जरिए वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
⏳ केरवा डैम की जांच पर फिलहाल लगा पेंच: पानी कम होने से टला सर्वे का काम
इस अभियान के तहत सर्वे टीम को केरवा डैम के आसपास फैले अतिक्रमण की भी पड़ताल करनी थी, लेकिन वहां अभी एक तकनीकी पेंच फंस गया है।
वर्तमान में केरवा डैम का जलस्तर अपने निर्धारित फुल टैंक लेवल (FTL) तक नहीं पहुंच पाया है। पानी का स्तर कम होने की वजह से वहां सटीक ग्राउंड ट्रुथिंग का काम मुमकिन नहीं हो पाया।
अधिकारियों और टीम के विशेषज्ञों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया है कि आधी-अधूरी स्थिति में सर्वे कर जल्दबाजी करने से बेहतर है कि सही जलस्तर का इंतजार किया जाए। केरवा डैम क्षेत्र में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी दिशा भी मंगलवार को एनजीटी की सुनवाई और निर्देशों के बाद ही तय होगी।
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