Indore Model: भिक्षुक मुक्त शहर बना इंदौर; भिखारी की सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, जानें प्रशासन का नया आदेश

इंदौर बना देश का पहला भिक्षुक मुक्त शहर। भिखारी की सूचना देने पर ₹1000 का इनाम। प्रशासन का कड़ा आदेश- भीख मांगने और देने वालों पर होगी कार्रवाई।

Jun 27, 2026 - 17:43
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Indore Model: भिक्षुक मुक्त शहर बना इंदौर; भिखारी की सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, जानें प्रशासन का नया आदेश

इंदौर। स्वच्छता के बाद अब इंदौर ने देश का पहला 'भिक्षुक मुक्त शहर' बनकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शहर में भिक्षावृत्ति को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन ने अब एक अनोखा कदम उठाया है—यदि कोई भी व्यक्ति सड़क या चौराहे पर भीख मांगते हुए किसी भिखारी की सूचना फोटो के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग को देता है, तो उसे ₹1000 का इनाम दिया जाएगा।

📞 सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर

इंदौर जिला प्रशासन ने भिक्षुओं की निगरानी के लिए एक मोबाइल नंबर 9691494951 जारी किया है। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुँचती है और संबंधित व्यक्ति को भिक्षुक आश्रय स्थल ले जाती है, जहाँ उसका पुनर्वास किया जाता है। बीते दो वर्षों में इंदौर में 5500 से अधिक भिखारियों का पुनर्वास कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा गया है।

⚖️ भीख देना और खरीदना भी अपराध

कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त निर्देश दिए हैं कि आने वाले त्योहारों के सीजन में भिक्षावृत्ति के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी। आदेश के अनुसार, केवल भीख मांगना ही नहीं, बल्कि उन्हें भीख देना या उन भिखारियों से सामान खरीदना भी कानूनी अपराध माना जाएगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

🛠️ कौशल विकास से रोजगार की ओर

पुनर्वासित किए गए भिखारियों को कौशल विकास (Skill Development) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भिक्षुक पुनर्वास केंद्र में रह रहे लोग अब गाय के गोबर से मूर्तियां बनाने जैसे स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आजीविका कमा रहे हैं। इसके अलावा, भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को चिह्नित कर उनका सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया गया है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

🤝 पुनर्वास की चुनौती और सफलता

पुनर्वास केंद्र की प्रभारी रुपाली जैन बताती हैं कि यह अभियान आसान नहीं था क्योंकि भिक्षावृत्ति के पीछे अक्सर मानव तस्करी और बाल तस्करी जैसे संगठित गिरोह सक्रिय होते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से आज इंदौर की सड़कों और चौराहों पर भिखारी नजर नहीं आते, जो देश के अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल है।

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