प्रशासनिक अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण; परिजनों को कंधों पर उठाकर ले जानी पड़ी मरीज, अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश

रीवा के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र में सड़क न होने के कारण बीमार आदिवासी महिला को खाट पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा। प्रशासनिक अनदेखी से ग्रामीणों में भारी रोष है।

Nov 01, 2026 - 19:26
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प्रशासनिक अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण; परिजनों को कंधों पर उठाकर ले जानी पड़ी मरीज, अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद विचलित कर देने वाली और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां एक 45 वर्षीय महिला की अचानक तबीयत बिगड़ जाने के बाद गांव तक एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच सकी। इसका मुख्य कारण यह था कि आजादी के इतने दशक बीत जाने के बाद भी यह गांव आज तक पक्की सड़क से नहीं जुड़ पाया है।

सरकारी और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बेबस परिजनों को खाट की डोली बनानी पड़ी और महिला को उसमें लिटाकर कंधों पर उठाकर कड़ी मशक्कत के साथ मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ा, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

🗺️ राबिया आदिवासी को खाट की डोली पर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए परिजन

यह झकझोर देने वाली घटना रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ढखरा गांव की है।

  • अचानक बिगड़ी तबीयत: बीते शनिवार को गजरूप आदिवासी की 45 वर्षीय पत्नी राबिया आदिवासी की अचानक तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई।

  • एम्बुलेंस के पहिए थमे: परिजनों ने तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन एम्बुलेंस मुख्य मार्ग तक पहुंचने के बाद आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि ढखरा गांव तक जाने के लिए कोई रास्ता या सड़क ही नहीं थी।

  • डेढ़ किलोमीटर का पैदल सफर: महिला की लगातार बिगड़ती हालत को देख परिजनों ने हिम्मत जुटाई और खाट की एक डोली तैयार की। उसी डोली को अपने कंधों पर टांगकर वे करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चले और मुख्य मार्ग तक पहुंचे, जहां से उसे अस्पताल ले जाया गया।

🗣️ 'कलेक्टर से लेकर विधायक तक लगाई गुहार, पर स्थिति जस की तस'—स्थानीय ग्रामीण

पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासी दिनेश रावत का कहना है कि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पिछले कई वर्षों से सड़क निर्माण किए जाने की मांग लगातार उठाई जा रही है:

  • जिम्मेदारों की अनदेखी: स्थानीय विधायक सिद्धार्थ तिवारी की जनसुनवाई से लेकर रीवा कलेक्टर तक कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

  • विकास से कोसों दूर: प्रशासनिक अनदेखी का खामियाजा ढखरा गांव के ग्रामीण भुगत रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाल केवल एक ढखरा गांव का नहीं है, बल्कि जिले भर में दर्जनों ऐसे गांव हैं जो आज भी सड़क विहीन हैं।

⚖️ समाजसेवी बीके माला ने शासन-प्रशासन को घेरा, उठाए कड़े सवाल

इस अमानवीय घटना पर नाराजगी जताते हुए समाजसेवी बीके माला ने शासन और प्रशासन को आड़े हाथों लिया है:

  • दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति: उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के विकसित भारत में अगर किसी गांव में आज भी सड़क का नामोनिशान नहीं है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

  • खोखले दावे: कांग्रेस हो या भाजपा, दोनों ही दल महिला सशक्तिकरण और आदिवासियों के उत्थान के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। यदि एक आदिवासी महिला को गंभीर बीमारी के दौरान समय पर इलाज न मिल पाए, तो इससे बड़ी व्यवस्था की विफलता क्या हो सकती है। उन्होंने संबंधित ग्राम पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल सड़क निर्माण कराने की मांग की है।

🔍 जनपद सीईओ प्रवीण बंसोड बोले—'जांच करवाकर की जाएगी उचित कार्रवाई'

मामले के तूल पकड़ने और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद त्योंथर जनपद सीईओ प्रवीण बंसोड ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है:

  • जांच के निर्देश: घटना से जुड़ा वीडियो और शिकायत उनके पास आई है। पूरे मामले की गहराई से जांच करवाई जा रही है और तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

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