मुरैना पुलिस की कार्रवाई: मुखबिर को ग्राहक बनाकर दबोचे गए तीन आरोपी, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत केस दर्ज
मुरैना की कोतवाली पुलिस ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में छापेमारी कर 2856 नशीले इंजेक्शन जब्त किए हैं। आगरा से जुड़े इस अवैध कारोबार में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
चंबल अंचल के मुरैना जिले में युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेलने वाला अवैध कारोबार तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। प्रतिबंधित और नशीले इंजेक्शन युवाओं के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर रहे हैं। इसी बीच, शहर की कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में किराए के मकान पर छापा मारकर 2856 नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं और तीन आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस खुलासे के बाद से पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी भारी मात्रा में ये खतरनाक इंजेक्शन शहर के भीतर तक कैसे पहुंच रहे थे।
🏠 किराए के मकान को बना रखा था गोदाम, आगरा से जुड़े हैं तार
पुलिस जांच में सामने आया है कि शहर में नशे के इस अवैध कारोबार का नेटवर्क काफी फैला हुआ था:
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गोदाम का खुलासा: नशीले इंजेक्शनों की सप्लाई करने वाले मुख्य आरोपियों ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में एक मकान किराए पर ले रखा था और उसे ही अवैध इंजेक्शनों का मुख्य गोदाम बना दिया था।
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आगरा कनेक्शन: आरोपी उत्तर प्रदेश के आगरा से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशे के इंजेक्शन खरीदते थे और उन्हें लाकर मुरैना तथा आसपास के इलाकों में सप्लाई करते थे। पुलिस ने मौके से 4.50 लाख रुपये मूल्य के कुल 2856 इंजेक्शन जब्त किए हैं।
💰 100 रुपए का इंजेक्शन 400 में बेचकर कर रहे थे अवैध कमाई
सिटी कोतवाली थाना प्रभारी अमित सिंह भदौरिया ने बताया कि आरोपी सिर्फ मेडिकल स्टोर या चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे सीधे युवाओं को भी ये नशे के इंजेक्शन महंगे दामों पर बेच रहे थे:
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मुनाफाखोरी: जो इंजेक्शन मूल कीमत पर बेहद सस्ते मिलते थे, उन्हें युवाओं की लत का फायदा उठाकर 300 से 400 रुपये तक में बेचा जा रहा था। इस तरह आरोपियों ने युवाओं की कमजोरी को अपनी अवैध कमाई का सबसे बड़ा जरिया बना लिया था।
🕵️♂️ फिल्मी स्टाइल में जाल बिछाया: मुखबिर को ग्राहक बनाकर भेजा और दबोचा
पुलिस को पिछले कुछ दिनों से पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में संदिग्ध गतिविधियों और नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त की लगातार सूचना मिल रही थी:
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दबोचने की रणनीति: टीआई अमित सिंह भदौरिया ने एक सटीक योजना बनाई और पुलिस के एक मुखबिर को ग्राहक बनाकर आरोपियों के पास भेजा।
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रंगे हाथों गिरफ्तारी: जैसे ही आरोपियों ने मुखबिर को इंजेक्शन देने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, वैसे ही सादे कपड़ों (Civil Dress) में तैनात पुलिसकर्मियों ने तीनों को घेरकर दबोच लिया।
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आरोपियों की पहचान: पकड़े गए आरोपियों की पहचान मयंक गुप्ता, अनिल उर्फ बॉबी गुप्ता और ईशान वर्मा (सभी निवासी मुरैना) के रूप में हुई है।
📦 5 अलग-अलग कंपनियों के इंजेक्शन जब्त, ड्रग्स एक्ट के तहत केस दर्ज
पुलिस ने मौके से विभिन्न कंपनियों के प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद किए हैं:
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जब्ती का ब्योरा: पुलिस ने पहली कंपनी के 1060, दूसरी कंपनी के 470, तीसरी कंपनी के 336, चौथी कंपनी के 330 और पांचवीं कंपनी के 560 इंजेक्शन जब्त किए हैं।
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वैधानिक कार्रवाई: पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (Drugs and Cosmetics Act) के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार और कहां-कहां जुड़े हैं तथा इन्हें मेडिकल सप्लाई कहां से मिल रही थी।
⚠️ एक युवक की आत्महत्या के बाद खुला था नशे के इस काले कारोबार का राज
गौरतलब है कि मुरैना के पोरसा कस्बे में 24 जुलाई 2026 को 19 वर्षीय सर्वेश राठौर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत (कथित आत्महत्या) का मामला सामने आया था:
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वायरल वीडियो: घटना से ठीक पहले युवक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसमें उसने नशे के इंजेक्शन की लत से तंग आने और क्षेत्र के एक मेडिकल स्टोर से आसानी से इंजेक्शन मिलने की बात कही थी।
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खौफनाक सच: युवक ने दावा किया था कि वह नशे की लत में अपने लाखों रुपये खर्च कर चुका है और क्षेत्र के कई अन्य युवा भी इस जानलेवा जाल में फंस चुके हैं। इसी सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और तब से लगातार इस अवैध नेटवर्क के खिलाफ दबिश दी जा रही है।
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