Chhatarpur Success Story: किसान के बेटे ने बदली परिवार की किस्मत; आर्मी ट्रेनिंग पूरी कर वर्दी पहन गांव लौटा तो छाया जश्न
छतरपुर के किसान के बेटे दीपक खंगार ने आर्मी ट्रेनिंग पूरी कर गांव में किया प्रवेश। एक ही परिवार के 3 भाई-बहन सरकारी सेवा में चयनित, गांव में मना दीपावली जैसा जश्न।
छतरपुर। बुंदेलखंड की धरती हमेशा से वीरों की जननी रही है। इसी माटी के लाल और एक किसान के बेटे दीपक खंगार ने देश सेवा का अपना सपना पूरा कर इतिहास रच दिया है। भारतीय सेना में 9 महीने की कठोर ट्रेनिंग पूरी कर जब दीपक पहली बार अपनी वर्दी में अपने गांव बीरो लौटे, तो ग्रामीणों ने उनका स्वागत किसी त्यौहार की तरह किया। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की बारिश के बीच फौजी बेटे का यह स्वागत देखते ही बनता था।
👨👩👧👦 एक ही परिवार के 3 रत्न: सरकारी सेवाओं में चयन
छतरपुर जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बरगुवा के बीरो गांव के किसान भगवान दास खंगार के परिवार के लिए यह गर्व का क्षण है। इस किसान परिवार के तीनों बच्चों ने अपनी मेहनत और संकल्प के दम पर सरकारी सेवा में स्थान बनाया है। बड़ा बेटा रोहित खंगार CISF में, बेटी रीना खंगार मध्य प्रदेश पुलिस में और छोटा बेटा दीपक खंगार भारतीय सेना में चयनित हुआ है। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की इस सफलता ने पूरे मध्य प्रदेश का मान बढ़ाया है।
🔥 संकल्प की जीत: अभावों को मात देकर बनी पहचान
दीपक खंगार का चयन 26 दिसंबर 2025 को हुआ था, जिसके बाद उन्होंने झांसी के फतेहगढ़ में अपनी ट्रेनिंग पूरी की। आर्थिक चुनौतियों और सीमित साधनों के बीच पली-बढ़ी इन तीन प्रतिभाओं ने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प अडिग हो, तो अभाव कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकते। ट्रेनिंग पूरी कर वर्दी में आए बेटे को देखकर माता कमलेश खंगार और पिता भगवान दास खंगार की आंखें खुशी से भर आईं।
✨ पिता का गर्व: 'सैनिक का पिता होना सौभाग्य की बात'
अपने बेटे के स्वागत के दौरान भावुक पिता भगवान दास खंगार ने कहा, "आज मेरा सपना पूरा हो गया। बेटे को देश की रक्षा करते हुए वर्दी में देखकर मन बहुत प्रसन्न है। मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे एक सैनिक का पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।" बीरो गांव के लोग दीपक की इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत मान रहे हैं।
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