विश्वविद्यालयों में समय पर परीक्षा और डिग्रियां न मिलने से युवाओं का भविष्य खतरे में, मुकेश नायक का हमला
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि प्रदेश के हजारों स्कूलों में एक-एक शिक्षक है और विश्वविद्यालयों में परिणाम में देरी हो रही है।
मध्य प्रदेश में शिक्षा के स्तर, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों की लचर कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने एक प्रेसवार्ता के दौरान राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। समय पर परीक्षाएं न होना और छात्रों को डिग्रियां मिलने में सालों की देरी होना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है।
📉 65 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त, 463 स्कूलों में एक भी छात्र ने नहीं लिया प्रवेश
मुकेश नायक ने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि मध्य प्रदेश के 7,217 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में करीब 65 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। विज्ञान, गणित, भौतिकी, रसायन और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों का भारी अभाव है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 463 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदेश में संचालित 54 निजी विश्वविद्यालयों पर भी सवाल उठाए और कहा कि समय पर परीक्षा परिणाम न आने से युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
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