Connectivity Crisis: श्योपुर जिले के कलमी गांव में नेटवर्क का टोटा; डिजिटल इंडिया के दौर में भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से दूर
श्योपुर के कलमी गांव में दशकों से मोबाइल नेटवर्क की समस्या। कॉल करने के लिए 9 किमी दूर जाने को मजबूर ग्रामीण। कलेक्टर ने टावर लगाने की मंजूरी दी।
श्योपुर। आज के दौर में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से मात्र 22 किलोमीटर दूर स्थित श्योपुर का 'कलमी गांव' आज भी बुनियादी डिजिटल सुविधाओं से कोसों दूर है। स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीणों को एक साधारण फोन कॉल करने, आपातकालीन मदद मांगने या ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं के लिए 9 किलोमीटर दूर गोरस गांव या श्योपुर शहर का रुख करना पड़ता है।
⏳ आजादी के बाद से जारी संघर्ष
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं, बल्कि आजादी के समय से ही बनी हुई है। क्षेत्र में मोबाइल सिग्नल न होने के कारण न केवल आपसी संपर्क टूट जाता है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में एंबुलेंस या अधिकारियों से संपर्क करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। नेटवर्क की तलाश में गांव से बाहर भटकने के कारण ग्रामीणों का कीमती समय और धन दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
🚜 खेती और शिक्षा पर गहरा असर
नेटवर्क की इस कमी का सीधा असर ग्रामीणों की आजीविका पर पड़ रहा है। किसान भाई मौसम की ताजा जानकारी, फसल पंजीयन, ई-केवाईसी और कृषि योजनाओं का लाभ समय पर नहीं उठा पा रहे हैं। वहीं, छात्र ऑनलाइन क्लास और प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने में असमर्थ हैं। गांव के मजदूर और छोटे व्यापारी भी डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सेवाओं से वंचित होकर पिछड़ रहे हैं।
🗣️ ग्रामीणों की पीड़ा और प्रशासन का आश्वासन
कलमी गांव निवासी भागचंद गुर्जर और पशुपालक मिट्ठू का कहना है कि वे वर्षों से प्रशासन से गांव में मोबाइल टावर लगवाने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से मुक्ति मिल सके। ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए श्योपुर कलेक्टर शीला दाहिमा ने सकारात्मक पहल की है। उन्होंने बताया कि, "BSNL कंपनी को टावर लगाने की अनुमति 3-4 दिन पहले दे दी गई है। जल्द ही गांव में मोबाइल टावर स्थापित हो जाएगा, जिसके बाद ग्रामीणों को नेटवर्क संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।"
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