42 साल में पहली बार सूखा बरगी बांध; तल से निकले मंदिर और पुरानी नावें, देखिए अद्भुत तस्वीरें

बरगी बांध में 42 सालों बाद जलस्तर रिकॉर्ड गिरावट के साथ 407 मीटर पर पहुंचा। बांध के तल से दिखे मंदिर और नावें। जानिए क्यों सुख रहा है नर्मदा का यह विशाल डैम?

Jun 30, 2026 - 14:24
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42 साल में पहली बार सूखा बरगी बांध; तल से निकले मंदिर और पुरानी नावें, देखिए अद्भुत तस्वीरें

जबलपुर। जबलपुर में नर्मदा नदी पर स्थित बरगी बांध इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बांध के जलस्तर में इतनी गिरावट आई है कि 42 वर्षों में पहली बार इसके तल में डूबे मंदिर और पुरानी नावें बाहर दिखाई देने लगी हैं। स्थानीय निवासियों के लिए यह नज़ारा जितना अद्भुत है, उतना ही चिंताजनक भी। बांध का जलस्तर घटकर 407.45 मीटर तक पहुंच गया है, जो बांध के इतिहास में एक रिकॉर्ड है।

📉 क्यों घट रहा है बांध का जलस्तर?

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, बांध में प्रतिदिन लगभग 5 सेंटीमीटर पानी कम हो रहा है। इसके मुख्य कारणों में गर्मी का प्रभाव, बिजली उत्पादन के लिए पावर प्लांट का निरंतर संचालन, और खरीफ फसल के लिए नहरों के माध्यम से पानी की भारी मांग शामिल है। नरसिंहपुर और कटनी जिले की ओर जाने वाली नहरों में पानी की आपूर्ति ने भी जलभराव को प्रभावित किया है।

🚧 इंजीनियरिंग का नमूना: पहली बार दिखा बांध का भीमकाय कैनाल गेट

बरगी बांध का 'फुल टैंक लेवल' 422.76 मीटर है। सामान्यतः पानी कभी भी 408 मीटर से नीचे नहीं जाता था, लेकिन इस वर्ष यह 407 मीटर तक गिर गया है। इस वजह से दायीं नहर का विशाल कैनाल गेट पानी के ऊपर नज़र आने लगा है। लगभग 50 फीट चौड़ा और 100 फीट ऊंचा यह विशाल स्ट्रक्चर इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है, जिसका 50 फीट हिस्सा हमेशा जलमग्न रहता था, लेकिन अब यह पहली बार पूरी तरह दृश्यमान हो गया है।

🏛️ बांध के तल से निकलकर सामने आए प्राचीन अवशेष

पानी कम होने से बांध के जल-भराव क्षेत्र में एक प्राचीन मंदिर दिखाई देने लगा है, जो दशकों से पानी के भीतर था। इसके साथ ही, पुनर्वास विभाग की एक पुरानी नाव भी मिली है जो बरसों से लावारिस पड़ी थी। ये दृश्य न केवल लोगों के लिए कौतूहल का विषय हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या यह मात्र जलवायु परिवर्तन का परिणाम है या जल प्रबंधन में कोई बड़ी चूक हुई है।

⚠️ भविष्य के लिए खतरे की घंटी?

जानकारों का कहना है कि बांध का इस तरह सूखना भविष्य में गंभीर जल संकट की ओर इशारा कर रहा है। प्रशासन के लिए अब यह जांच का विषय है कि क्या पानी का स्तर गिरने के पीछे केवल प्राकृतिक कारण हैं या अत्यधिक दोहन भी इसका कारण है। बरगी बांध का यह स्वरूप न केवल इतिहास के पन्ने खोल रहा है, बल्कि नर्मदा के जल प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।

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