बरगी बांध परियोजना में करोड़ों का घोटाला? CAG रिपोर्ट में खुलासा, ठेकेदार को मिला दोगुना भुगतान
स्लीमनाबाद टनल निर्माण में करोड़ों के कथित घोटाले का मामला। CAG रिपोर्ट में ठेकेदार को गलत भुगतान का खुलासा। लोकायुक्त जांच की मांग, जानें पूरी खबर।
जबलपुर। स्लीमनाबाद में बरगी बांध से जुड़ी नहर के लिए बनाई गई 12 किलोमीटर लंबी टनल विवादों के घेरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस टनल के निर्माण में ठेकेदार को नियमों के विरुद्ध करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट ने जबलपुर लोकायुक्त पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
💰 लागत से दोगुना भुगतान का दावा
साल 2007 में पटेल इंजीनियरिंग को लगभग 1,600 करोड़ रुपये में यह टनल बनाने का टेंडर दिया गया था। लगभग 20 साल बाद भी यह परियोजना पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो सकी है। आरोप है कि इस दौरान कंपनी को न केवल तय समय से अधिक भुगतान किया गया, बल्कि कई मदों में लागत से दोगुना पैसा दिया गया। आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज मिश्रा के अनुसार, यह घोटाला लगभग 600 करोड़ रुपये का हो सकता है।
🔍 कैग रिपोर्ट में अनियमितता की पुष्टि
31 मार्च 2023 को जारी CAG रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुँचाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदार को उन कार्यों के लिए भी भुगतान किया गया, जो या तो हुए ही नहीं थे या जिनमें भारी अनियमितता बरती गई। साथ ही, ठेका लेने वाली कंपनी द्वारा काम सब-लेट (दूसरी कंपनियों को देने) करने के बावजूद विभाग द्वारा कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
⚖️ विभाग का पक्ष: आरोपों को किया खारिज
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के चीफ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर डीएल वर्मा ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह एक अत्यंत जटिल और बड़ा निर्माण कार्य था, जिसके दौरान कुछ अतिरिक्त खर्च अपरिहार्य थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अतिरिक्त खर्चों के लिए सरकार से विधिवत अनुमति ली गई थी। उन्होंने CAG की रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए कहा कि टनल का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही इससे पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
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