समय से पहले सफेद हो रहे हैं बाल? डॉक्टर से जानें खान-पान और दिनचर्या में कौन से बदलाव हैं जरूरी
कम उम्र में बाल क्यों सफेद होते हैं? आयुर्वेद विशेषज्ञ से जानें बालों के असमय पकने (Premature Greying) के शारीरिक और मानसिक कारण और बचाव के उपाय।
शहडोल। भागदौड़ भरी इस जिंदगी में समय से पहले बाल सफेद होना एक आम समस्या बनती जा रही है। लोग इसे लेकर बेहद चिंतित रहते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अंकित नामदेव के अनुसार, बालों का समय से पहले पकना (Premature Greying of Hair) एक गंभीर विषय है। अक्सर हम बालों को केवल 'डेड टिशु' समझते हैं, लेकिन बालों की जड़ें (हेयर रूट) जीवित होती हैं। जब इन्हें उचित पोषण नहीं मिलता, तो मेलेनिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बाल अपना प्राकृतिक रंग खो देते हैं।
⚖️ आयुर्वेद और एलोपैथी का नजरिया
एलोपैथी के अनुसार, यह समस्या शरीर में सूक्ष्म खनिजों (Micro-minerals) और पोषक तत्वों की कमी के कारण होती है। वहीं, आयुर्वेद इसे मुख्य रूप से 'पित्त प्रकोप' का परिणाम मानता है। जब शरीर में पित्त बढ़ता है, तो बाल असमय सफेद होने लगते हैं। अतः बालों के रंग को बचाए रखने के लिए पित्त को संतुलित रखना अनिवार्य है।
🧠 शारीरिक और मानसिक कारण: तनाव और जीवनशैली
डॉ. नामदेव बताते हैं कि बाल सफेद होने के पीछे दो मुख्य कारक हैं:
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शारीरिक: गलत दिनचर्या, अनुचित खान-पान और ऋतुओं के अनुसार न ढलना।
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मानसिक: अत्यधिक तनाव (Mental Stress), अनिद्रा (Insomnia), और मानसिक थकान। आज के दौर में बच्चे पढ़ाई और करियर को लेकर उम्र से ज्यादा तनाव ले रहे हैं, जो उनके बालों की सेहत पर बुरा असर डालता है।
🧴 गलत उत्पादों का चुनाव और दुष्प्रभाव
अक्सर हम बालों की देखभाल के नाम पर बड़ी भूल कर देते हैं:
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बाजार में उपलब्ध 'मिनरल ऑयल' आधारित तेलों का प्रयोग करना।
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हार्श केमिकल वाले शैम्पू और कंडीशनर का अत्यधिक उपयोग।
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हेयर ड्रायर का लगातार उपयोग करना।
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रात को जागना और दिन में सोना।
डॉक्टर की सलाह है कि स्वस्थ बालों के लिए शास्त्रोक्त विधि से बने तेलों का उपयोग करें, तनाव कम करें और संतुलित दिनचर्या का पालन करें। खान-पान में ऐसा बदलाव लाएं जो शरीर में पित्त दोष को न बढ़ाए।
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