विदिशा में देहदान पर राजकीय सम्मान; पुलिस ने दी अंतिम सलामी, जानें क्या है पूरा मामला
विदिशा के ओकायला निवासी 80 वर्षीय हलकईं ने देहदान कर समाज को नई राह दिखाई। मेडिकल कॉलेज को सौंपा शरीर, प्रशासन ने दिया राजकीय सम्मान।
विदिशा। मानवता और समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल विदिशा जिले के ओकायला गांव से सामने आई है। 80 वर्षीय बुजुर्ग हलकईं ने अपनी मृत्यु के उपरांत देहदान कर चिकित्सा विज्ञान और समाज के लिए एक नई राह दिखाई है। उनके निधन के बाद शोकाकुल परिवार ने उनकी वसीयत और अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनका पार्थिव शरीर विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय को सौंप दिया।
🎖️ पुलिस ने दी अंतिम राजकीय सलामी
दिवंगत हलकईं के इस महान त्याग को सम्मानित करने के लिए मध्य प्रदेश शासन के नियमों के तहत प्रशासन द्वारा विशेष कदम उठाया गया। मेडिकल कॉलेज परिसर में पुलिस प्रशासन की टुकड़ी ने उनके पार्थिव शरीर को 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया। शस्त्र झुकाकर दी गई इस सलामी के क्षण में वहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। सब-इंस्पेक्टर बलवीर सिंह ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण था, क्योंकि धन-संपत्ति के दान से इतर अपनी पूरी देह दान करना मानवता के प्रति सर्वोच्च समर्पण है।
💡 संत रामपाल महाराज की प्रेरणा से लिया संकल्प
स्वर्गीय हलकईं सुप्रसिद्ध संत रामपाल महाराज के अनुयायी थे। संत रामपाल महाराज अपने सत्संगों में अनुयायियों को प्रेरित करते हैं कि मानव शरीर जीवित रहते हुए परोपकार में और मृत्यु के बाद चिकित्सा विज्ञान के शोध में काम आना चाहिए। इसी विचार से प्रभावित होकर उन्होंने देहदान का संकल्प लिया था। अनुयायी दीपक पंथी ने बताया कि महाराज के मार्गदर्शन में देश भर में देहदान, रक्तदान और असहायों के लिए निशुल्क राशन वितरण जैसे सेवा कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। हलकईं जी का यह निस्वार्थ कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बना रहेगा।
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