महाकाल लोक में बनेगा सनातन 'चित्रलोक'; 18 महापुराणों की कथाएं अब पेंटिंग्स के जरिए होंगी जीवंत

महाकाल लोक में तैयार हो रहा है सनातन 'चित्रलोक'। 18 महापुराणों की कथाएं 18 पारंपरिक शैलियों में होंगी प्रदर्शित। सोना-चांदी और प्राकृतिक रंगों का होगा उपयोग।

Jul 06, 2026 - 19:00
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महाकाल लोक में बनेगा सनातन 'चित्रलोक'; 18 महापुराणों की कथाएं अब पेंटिंग्स के जरिए होंगी जीवंत

उज्जैन। महाकाल नगरी उज्जैन के 'महाकाल लोक' में आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द ही सनातन संस्कृति का एक अनूठा अनुभव मिलने वाला है। यहाँ 'त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय' में 18 महापुराणों पर आधारित एक भव्य 'सनातन चित्रलोक' (चित्रदीर्घा) तैयार की जा रही है। वर्ष 2019 से शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य महापुराणों के गूढ़ ज्ञान और कथाओं को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर, कला के माध्यम से आमजन तक पहुँचाना है। इस परियोजना की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 'मन की बात' कार्यक्रम में कर चुके हैं।

🖌️ 18 पारंपरिक शैलियों में होगा चित्रांकन

इस दीर्घा में भारत की 18 प्रमुख पारंपरिक चित्र शैलियों का समावेश किया जा रहा है। इसमें केरल म्यूरल, कलमकारी, चेरियल पट्टम, गोंड आर्ट, बूंदी, कोटा, मारवाड़, गंजीफा और गुलेर जैसी विविध शैलियां शामिल हैं। देश के प्रतिष्ठित कलाकार अपने पारंपरिक माध्यमों से इन पुराणों को साकार कर रहे हैं। जैसे, ओडिशा के प्रहलाद महाराणा 'विष्णु पुराण' को ओडिसी शैली में और राजस्थान के जयशंकर शर्मा 'ब्रह्मवैवर्त पुराण' को बूंदी शैली में चित्रित कर रहे हैं।

✨ आधुनिक तकनीक और कला का अनूठा मेल

परियोजना का लक्ष्य लगभग 2,500 चित्रों को तैयार करना है। इन चित्रों में शुद्ध सोना-चांदी, पत्थरों और खनिजों से निर्मित प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है, जो इसे अत्यंत जीवंत और टिकाऊ बनाते हैं। दर्शकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए इसे आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। चित्रों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे दर्शक डिजिटल माध्यम से प्रत्येक चित्र की कथा, उसका महत्व और शीर्षक देख-सुन सकेंगे। संग्रहालय की ये दीर्घाएं तैयार होने के बाद, यह भारतीय कला और पुराणों के अध्ययन का विश्वस्तरीय केंद्र बनेंगी।

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