मध्य प्रदेश बना पांडुलिपियों का गढ़; डिजिटल इंडिया पहल में एमपी ने रचा इतिहास, इंदौर रहा अव्वल
मध्य प्रदेश में मिला इतिहास का खजाना। 34 लाख से अधिक पांडुलिपियों का संरक्षण। रानी लक्ष्मीबाई का दुर्लभ पत्र और फोटो मिली। जानें पूरी रिपोर्ट।
भोपाल। मध्य प्रदेश में 'ज्ञान भारतम्' डिजिटल पहल के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। प्रदेश में अब तक 34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपियों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है, जो देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक है। इस सघन अभियान के दौरान कई ऐतिहासिक और दुर्लभ दस्तावेज प्रकाश में आए हैं, जिनमें महारानी लक्ष्मीबाई से जुड़े दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण हैं।
🖋️ रानी लक्ष्मीबाई का दुर्लभ पत्र और पोट्रेट
अभिलेखागार में 1857 के विद्रोह से पूर्व का रानी लक्ष्मीबाई का एक दुर्लभ पत्र प्राप्त हुआ है। बुंदेली बोली में लिखे इस पत्र में रानी ने टीकमगढ़ की रानी दुलैया जू देव को अपनी 'बड़ी बहन' संबोधित करते हुए एकजुट होने का आग्रह किया था। पत्र पर उनकी आधिकारिक मुहर भी लगी है। इसके साथ ही, दतिया म्यूजियम में रानी की एक दुर्लभ पेंटिंग मिली है, जिसमें प्राकृतिक रंगों के साथ सोने (Gold) का उपयोग किया गया है। यह पेंटिंग उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव के दत्तक ग्रहण उत्सव के दौरान बनवाई गई थी।
🗺️ अन्य प्रमुख खोजें और डेटा
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1591 का काव्य: पन्ना से महाकवि केशव दास रचित 'रसिक प्रिया' की हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है, जो रीतिकाल का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
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जम्बूद्वीप का नक्शा: टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का रहस्यमयी नक्शा प्राप्त हुआ है, जो प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाता है।
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सर्वाधिक रजिस्ट्रेशन: राज्य में इंदौर जिले ने बाजी मारते हुए 3 लाख 99 हजार से अधिक पांडुलिपियों का रजिस्ट्रेशन किया है। इसके बाद रीवा और बैतूल का स्थान आता है।
यह डिजिटल पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को नष्ट होने से बचा रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास के इन अनछुए पहलुओं को सुरक्षित भी कर रही है।
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