मालवा में सोयाबीन से बढ़ा किसानों का मोहभंग; मक्का और कपास की ओर बढ़ा रुझान, जानें कारण
मानसून में देरी के कारण मालवा में सोयाबीन की बुवाई में 10% की गिरावट। किसान अब मक्का, कपास और मूंगफली जैसी फसलों को दे रहे प्राथमिकता।
रतलाम। मालवा क्षेत्र में खरीफ सीजन की फसल पद्धति में इस वर्ष बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जून माह में बारिश की कमी और मानसून के 15 दिन देरी से आने के कारण सोयाबीन (पीला सोना) का रकबा लगातार घट रहा है। किसान अब सोयाबीन के बजाय मक्का, मूंगफली और कपास जैसी फसलों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। रतलाम जिले के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष सोयाबीन का रकबा 10% तक घटकर 2 लाख 90 हजार हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले वर्ष 3 लाख 22 हजार हेक्टेयर था।
📊 बढ़ती लागत और घटता उत्पादन बना मुख्य कारण
किसान मानवेंद्र सिंह बताते हैं कि सोयाबीन की खेती में लगातार बढ़ती लागत और अनिश्चित उत्पादन ने किसानों को हताश किया है। मानसून में देरी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया, जिसके चलते किसानों ने कम लागत और बेहतर उत्पादन की उम्मीद में मक्का की ओर रुख किया है। कृषि अधिकारी बिका वास्के के अनुसार, रतलाम के सैलाना, बाजना और आलोट ब्लॉक में किसानों का रुझान मक्का और कपास की तरफ काफी बढ़ा है।
📈 मक्का और कपास का बढ़ा रकबा
कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में फसल विविधीकरण की एक नई लहर दिखाई दे रही है:
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मक्का: इसका रकबा इस बार करीब 15% बढ़कर 32,500 हेक्टेयर तक पहुँच गया है।
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कपास: सैलाना और बाजना ब्लॉक में कपास का रकबा 20% की वृद्धि के साथ 10,500 हेक्टेयर हो गया है।
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मूंगफली: इस फसल का रकबा भी 2,000 हेक्टेयर तक बढ़ाया गया है।
यद्यपि सोयाबीन अभी भी क्षेत्र में सर्वाधिक क्षेत्रफल वाली फसल बनी हुई है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से इसमें आ रही लगातार गिरावट यह स्पष्ट करती है कि मालवा के किसान अब वैकल्पिक फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
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