ट्रंप के ऐलान से दुनिया में खलबली; ईरान-अमेरिका समझौता टूटा, क्या फिर शुरू होगी जंग?
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता टूटा। ट्रंप ने समझौते को बताया समय की बर्बादी। पाकिस्तान की मध्यस्थता विफल, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ा तनाव।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ हुआ 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। हालिया घटनाक्रमों के बाद इस समझौते का कोई महत्व नहीं रह गया है। ट्रंप ने ईरान के साथ किसी भी बातचीत को 'समय की बर्बादी' करार दिया है। मंगलवार, 07 जुलाई को अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले ने वर्षों से चले आ रहे युद्धविराम (Ceasefire) को आधिकारिक रूप से तोड़ दिया है।
🔥 बढ़ता सैन्य तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइलें
तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सऊदी अरब और कतर के तेल एवं गैस टैंकरों पर मिसाइलें दाग दीं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए। इस घटनाक्रम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बार फिर बड़े संकट के बादल खड़ा कर दिए हैं। यदि यह सैन्य संघर्ष इसी तरह आगे बढ़ा, तो दुनिया को गंभीर आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ सकता है।
🇵🇰 पाकिस्तान की विफलता और कूटनीतिक चुप्पी
इस समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और इसके लिए खूब श्रेय भी लिया था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लेकर सरकार के मंत्रियों ने इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया था। हालांकि, अब समझौता टूटने के बाद पाकिस्तान पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय 'दो नावों पर सवार' है—वह अमेरिका के साथ अपने आर्थिक सहयोग को भी दांव पर नहीं लगाना चाहता और चीन के साथ अपने संबंधों तथा ईरान के साथ अपनी सीमा सुरक्षा और ऊर्जा हितों को भी सुरक्षित रखना चाहता है।
🤔 पाकिस्तान के सामने बड़ी चुनौती
पाकिस्तान की चुप्पी के पीछे का कारण स्पष्ट है:
-
आर्थिक मजबूरियां: पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने आर्थिक संबंधों को नहीं तोड़ सकता।
-
ईरान का डर: ईरान के खिलाफ बोलने से उसे अपने आवाम की आलोचना का सामना करना पड़ेगा और वह सीमा सुरक्षा खो सकता है।
-
चीन का प्रभाव: ईरान चीन का एक बड़ा सहयोगी है, और ईरान के खिलाफ जाकर पाकिस्तान चीन को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकता।
यह समझौता टूटना न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि पाकिस्तान जैसे देशों की 'मध्यस्थ' के रूप में विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)