बगलामुखी मंदिर दान विवाद; निजी समिति ने दी सफाई, कहा- प्रशासन की जानकारी में हुआ था पूरा काम
आगर मालवा के बगलामुखी मंदिर में दान और चंदे के मामले में जांच शुरू। सुदर्शन समिति ने दावों का खंडन किया, कहा- दान का पूरा हिसाब पारदर्शी है।
आगर मालवा। आगर मालवा स्थित विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर इन दिनों दान और चंदे के हिसाब-किताब को लेकर चर्चाओं में है। मंदिर के गर्भगृह और सौंदर्यीकरण के लिए एक निजी 'सुदर्शन समिति' द्वारा जुटाए गए दान और कीमती धातुओं के लेनदेन में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे थे। अब समिति के सदस्य बलराम जाधव ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा है।
📊 पारदर्शिता का दावा और जांच में सहयोग
बलराम जाधव ने दावों का खंडन करते हुए कहा कि समिति का उद्देश्य केवल मंदिर को भव्य बनाना था। उन्होंने बताया कि समिति का पंजीकरण कराया गया था और दान की गई चांदी व नगद राशि का पूरा हिसाब मंदिर परिसर में बोर्ड पर लगाया गया है। जाधव का दावा है कि दान की राशि सीधे बैंक खातों में जमा होती रही है और उसका नियमित ऑडिट कराया गया है। उन्होंने प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी के समक्ष पूरा रिकॉर्ड सौंपने की बात कही है।
📜 दानदाताओं की सूची में बड़े अधिकारियों के नाम
मंदिर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सौंदर्यीकरण के लिए दान देने वालों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं। मंदिर परिसर में लगे बोर्ड पर उन श्रद्धालुओं के नाम अंकित हैं जिन्होंने आधा किलो से अधिक चांदी दान की थी। दिलचस्प बात यह है कि इस सूची में तत्कालीन एसडीएम मिलिंद ढोके और तत्कालीन तहसीलदार प्रीति भिनसे का नाम भी दर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने मंदिर के लिए एक-एक किलो चांदी दान स्वरूप दी थी।
🔎 प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
जिला प्रशासन ने मंदिर के सोने-चांदी के आवरण चढ़ाने और जुटाए गए चंदे की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस कमेटी को 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। मंदिर प्रशासन और श्रद्धालु अब इस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दान के प्रबंधन में कहीं कोई गड़बड़ी हुई है या यह केवल एक भ्रम की स्थिति है।
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