दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में एक्सपायरी नाश्ता; आईआरसीटीसी की लापरवाही पर भड़के यात्री

नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों को परोसी गई एक्सपायरी ब्रेड। फूड पॉइजनिंग के डर से यात्रियों ने किया हंगामा, रेलवे की बड़ी लापरवाही।

Jul 11, 2026 - 14:13
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दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में एक्सपायरी नाश्ता; आईआरसीटीसी की लापरवाही पर भड़के यात्री

भोपाल। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस (12002) में शनिवार सुबह यात्रियों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ सामने आया है। ट्रेन के सी-4 कोच में सफर कर रहे यात्रियों को नाश्ते में ऐसी ब्रेड परोसी गई, जिसकी उपयोग की अवधि (Expiry Date) एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। इस लापरवाही के कारण यात्रियों में फूड पॉइजनिंग को लेकर दहशत फैल गई और उन्होंने जमकर हंगामा किया।

⚠️ यात्रियों की सतर्कता से खुला 'एक्सपायरी' राज

घटना तब सामने आई जब नाश्ता कर रहे एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर छपी 'यूज़ बाय' तारीख पर पड़ी, जिस पर 10 जुलाई 2026 अंकित था, जबकि शनिवार को 11 जुलाई 2026 थी। सी-4 कोच में मौजूद करीब 74 यात्रियों में से अधिकांश इसे खा चुके थे। जब यात्रियों ने कोच के बाहर रखे कैटरिंग पैकेट्स की जांच की, तो वहां भी उसी एक्सपायरी डेट वाले ब्रेड के बंडल मिले, जिससे पूरी ट्रेन में दूषित नाश्ता सप्लाई होने की आशंका बढ़ गई है।

🚂 आईआरसीटीसी की गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया

इस मामले में जब यात्रियों ने आईआरसीटीसी के अधिकारियों से शिकायत की, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। रीजनल अधिकारी मनोरंजन बिनकर ने तर्क दिया कि यह नॉर्दर्न रेलवे की ट्रेन है और खाना दिल्ली से लोड होता है। रेलवे नियमावली के अनुसार, ऑनबोर्ड कैटरिंग की पूरी जिम्मेदारी संबंधित रेलवे जोन की होती है, लेकिन इस तरह के बयानों ने यात्रियों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। उन्होंने अब उपभोक्ता आयोग (कंज्यूमर कमीशन) पोर्टल पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

📉 लगातार दूसरे दिन सवालों के घेरे में 'शताब्दी का स्वाद'

शताब्दी एक्सप्रेस की कैटरिंग व्यवस्था बीते दो दिनों से लगातार विवादों में है। इस घटना से एक दिन पहले, 10 जुलाई को भी गाड़ी संख्या 12001 (भोपाल-दिल्ली) में भोजन की घटिया गुणवत्ता और कम मात्रा को लेकर एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को शिकायत की थी। लगातार सामने आ रही इन गंभीर शिकायतों ने वीआईपी ट्रेनों की कैटरिंग और गुणवत्ता जांच प्रणाली (Quality Control) की पोल खोलकर रख दी है।

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