छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा का प्रावधान, महाराष्ट्र ने बनाए नियम, मप्र में प्रक्रिया लंबित

भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के दो साल बाद भी मध्य प्रदेश में सामुदायिक सेवा को दंड के रूप में लागू करने के नियम अधिसूचित नहीं हो पाए हैं।

Sep 05, 2026 - 19:29
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छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा का प्रावधान, महाराष्ट्र ने बनाए नियम, मप्र में प्रक्रिया लंबित

देश में नए आपराधिक कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू हुए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसके तहत 'सामुदायिक सेवा' को दंड के रूप में कानूनी रूप से लागू करने के लिए आवश्यक नियम अब तक अधिसूचित नहीं किए जा सके हैं। नया आपराधिक कानून एक जुलाई 2024 से पूरे देश में प्रभावी हुआ था, जिसमें पहली बार छोटे अपराधों के लिए जेल या जुर्माने के विकल्प के रूप में सामुदायिक सेवा को सुधारात्मक सजा के तौर पर शामिल किया गया है। पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र ने नवंबर 2025 में ही इससे जुड़े नियम अधिसूचित कर दिए हैं, जबकि मप्र में यह प्रक्रिया अभी लंबित है।

📜 BNS की धारा 4 और BNSS की धारा 23 में क्या है सामुदायिक सेवा का प्रावधान?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 4 में कुल छह प्रकार की सजाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें मृत्युदंड, आजीवन कारावास, साधारण या कठोर कारावास, संपत्ति की जब्ती, जुर्माना और अब 'सामुदायिक सेवा' भी शामिल है। इसके अलावा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 23 के तहत सामुदायिक सेवा का अर्थ ऐसे कार्य से है, जिसे अदालत किसी दोषी व्यक्ति से समाज के लाभ के लिए बिना किसी पारिश्रमिक के करवाने का आदेश दे सकती है। इस प्रावधान का मुख्य उद्देश्य छोटे-मोटें अपराधों के लिए अपराधियों को जेल भेजने के बजाय उनमें सुधार लाना और समाज के प्रति उनकी जवाबदेही तय करना है।

🧹 किन छह अपराधों में मिल सकती है सामुदायिक सेवा की सजा और क्या होंगे कार्य?

बीएनएस के तहत मुख्य रूप से छह ऐसे छोटे अपराध तय किए गए हैं जिनमें दोषियों को सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकती है। इनमें लोक सेवक द्वारा अवैध रूप से व्यापार करना (धारा 202), अदालत में पेश न होना (धारा 209), लोक सेवक को रोकने के लिए आत्महत्या का प्रयास (धारा 226), पांच हजार रुपये से कम की पहली बार चोरी, सार्वजनिक स्थान पर नशे में दुर्व्यवहार (धारा 355) और मानहानि (धारा 356(2)) शामिल हैं। इन मामलों में दोषियों से सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संस्थाओं में सेवा जैसे कार्य कराए जा सकते हैं, हालांकि इसके विस्तृत नियम और निगरानी व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा ही तय की जानी है।

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