रतलाम में सोयाबीन की खेती को लेकर किसान परेशान; अनियमित बारिश से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा
रतलाम और मालवा क्षेत्र में अनियमित बारिश के कारण सोयाबीन की खेती पर संकट। दो-तीन बार बुवाई के बाद भी अंकुरण न होने से रकबा घटने और दाम बढ़ने की आशंका।
रतलाम। मध्य प्रदेश का मालवा क्षेत्र, जो सोयाबीन उत्पादन के लिए देश भर में प्रसिद्ध है, इस वर्ष गंभीर कृषि संकट से जूझ रहा है। मानसून में देरी और अनियमित बारिश के चलते किसानों को सोयाबीन की फसल के लिए दो से तीन बार बुवाई करनी पड़ रही है। इसके बावजूद बारिश की कमी के कारण अंकुरण (Germination) न होने से हजारों हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने की स्थिति बन गई है।
🚜 बार-बार बुवाई की मार, किसानों की लागत बढ़ी
रतलाम जिले के दंतोडिया और सेमलिया सहित कई गांवों के किसानों ने बताया कि वे अपनी फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसान सुरेश पाटीदार और राजेश गोस्वामी के अनुसार, दो बार बुवाई फेल होने के बाद अब वे तीसरी बार प्रयास कर रहे हैं। नुकसान के डर से कई किसानों ने सोयाबीन का मोह छोड़कर मक्का और उड़द जैसी वैकल्पिक फसलें बोना शुरू कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार सोयाबीन का कुल रकबा 10 प्रतिशत तक घट सकता है।
📉 उत्पादन पर असर: बाजार में बढ़ सकते हैं तेल के दाम
कृषि विभाग के अधिकारी बिका वास्के ने पुष्टि की है कि मानसून की प्रतिकूल स्थितियों ने सोयाबीन उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मालवा क्षेत्र में उत्पादन घटने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सोया व्यापार से जुड़े नरेंद्र जैन का कहना है कि यदि उत्पादन में कमी आती है, तो सोयाबीन के बाजार भाव में तेजी आएगी, जिसके परिणामस्वरूप सोया तेल भी महंगा हो सकता है।
⚖️ आर्थिक आधार पर प्रहार
सोयाबीन मालवा के किसानों की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। बार-बार बुवाई करने से बढ़ती लागत और फसल की बर्बादी से किसान आर्थिक संकट में हैं। यदि आगामी दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो यह खरीफ सीजन मालवा के कृषि अर्थतंत्र के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। किसान अब सरकार से विशेष मुआवजे और फसल नुकसान के आकलन की मांग कर रहे हैं।
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