वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर गरमाया विवाद; शिया समुदाय ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का विरोध। शिया समुदाय ने बोर्ड की संरचना और मुस्लिम प्रतिनिधित्व की कमी पर उठाए गंभीर सवाल।

Jul 13, 2026 - 16:09
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वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर गरमाया विवाद; शिया समुदाय ने उठाए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर जारी विवाद अब एक नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। अब तक सुन्नी और सामाजिक संगठनों द्वारा व्यक्त की जा रही आपत्तियों के बीच, शिया समुदाय ने भी पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है। करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने कहा कि वक्फ की संपत्तियां मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक अमानत हैं, इसलिए इनके प्रबंधन में बाहरी या गैर-मुस्लिम हस्तक्षेप उचित नहीं है।

📜 'नवाबों और पूर्वजों की दान की हुई संपत्ति है वक्फ'

मौलाना रिजवी ने तर्क दिया कि वक्फ की जमीनें वर्षों पहले मुस्लिम शासकों, नवाबों और संपन्न लोगों द्वारा शिक्षा, गरीबों की सहायता और कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए दान की गई थीं। उन्होंने कहा कि इन संपत्तियों के संरक्षण और संचालन का उत्तरदायित्व मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के पास ही रहना चाहिए। उनका मानना है कि बोर्ड का स्वरूप अत्यधिक संवेदनशील है, अतः इसमें बाहरी हस्तक्षेप से बचा जाना अनिवार्य है।

⚖️ शिया समाज की अनदेखी पर जताई नाराजगी

मौलाना रिजवी ने नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर गहरी निराशा जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में शिया आबादी का बड़ा वर्ग है और कई महत्वपूर्ण संस्थान भी उनके अधीन हैं। उन्होंने बोर्ड के गठन में संतुलन की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बोर्ड का गठन किया जा रहा था, तो उसमें सभी मुस्लिम वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए था।

📢 आपसी एकता और धार्मिक पदों की जिम्मेदारी

मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समुदाय से आपसी मतभेद भुलाकर संगठित होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समुदाय की चुनौतियों का सामना करने के लिए एकता आवश्यक है। गौरतलब है कि इस नियुक्ति को लेकर निकाह काजी मौलाना मआज ने विरोध स्वरूप अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। शहर काजी और अन्य धार्मिक पदों पर बैठे लोगों के रुख को लेकर भी समाज के भीतर बहस तेज है। हालांकि, इस पूरे मामले पर शहर काजी मुश्ताक अली नदवी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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