एथेनॉल ब्लेंडिंग के चावल पर घमासान! FCI ने सोशल मीडिया पर आंकड़े जारी कर विपक्ष के आरोपों को नकारा

मध्य प्रदेश में ₹1160 करोड़ के चावल घोटाले के आरोपों को FCI ने बेबुनियाद बताया है। एफसीआई के अनुसार वास्तविक हेराफेरी केवल ₹5.63 लाख की है और जांच जारी है। (164 Characters)

Jul 14, 2026 - 18:00
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एथेनॉल ब्लेंडिंग के चावल पर घमासान! FCI ने सोशल मीडिया पर आंकड़े जारी कर विपक्ष के आरोपों को नकारा

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी सब्सिडी वाले राशन (चावल) में कथित घोटाले को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच भारतीय खाद्य निगम (FCI) का आधिकारिक बयान सामने आया है। विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे ₹1160 करोड़ के घोटाले के आरोपों को एफसीआई ने तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है। एफसीआई ने स्पष्ट किया कि जांच के दायरे में आया गायब चावल एथेनॉल ब्लेंडिंग के तहत सप्लाई किया गया पूरा स्टॉक नहीं है, बल्कि इस कथित हेराफेरी की कुल कीमत मात्र 5.63 लाख रुपये है।

📊 सोशल मीडिया पर जारी किए आंकड़े: कुल स्टॉक का नहीं, केवल 490 बोरियों के दुरुपयोग का है मामला

भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर विस्तृत आंकड़े पेश करते हुए अपना पक्ष रखा। एफसीआई ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में डिस्टिलरीज को कुल 5.39 लाख मीट्रिक टन (LMT) चावल जारी किया गया था। रिपोर्टों में जो ₹1160 करोड़ का आंकड़ा दिखाया जा रहा है, वह कुल 5 LMT चावल की जारी कीमत (23.20 रुपये प्रति किलोग्राम) के आधार पर निकाला गया है:

  • गणित की भूल: 50,00,00,000 किलोग्राम * 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम = 1,160 करोड़ रुपये।

  • वास्तविक स्थिति: यह ₹1160 करोड़ वह कुल राशि है जो डिस्टिलरीज ने वैध रूप से चावल उठाने के लिए एफसीआई को चुकाई थी। वास्तविक गड़बड़ी पूरे स्टॉक में नहीं, बल्कि केवल 242.50 क्विंटल चावल (लगभग 490 बोरी) के परिवहन के दौरान हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत महज 5.63 लाख रुपये है।

⚖️ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई: संबंधित राइस मिल ब्लैकलिस्टेड, ₹44.12 लाख का भारी जुर्माना

भारतीय खाद्य निगम ने साफ किया कि परिवहन के दौरान इस अनियमितता का पता किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि स्वयं सरकारी निगरानी तंत्र ने लगाया था। जून 2026 के पहले सप्ताह में गड़बड़ी सामने आते ही एफसीआई ने संबंधित डिस्टिलरी को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद राज्य खाद्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 जून 2026 को इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई। वर्तमान में 242 क्विंटल चावल के इस मामले की विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है। लापरवाही बरतने वाली संबंधित राइस मिल को ब्लैकलिस्ट कर उस पर 44.12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

🔍 क्या था सब्सिडी वाले चावल के परिवहन में हेराफेरी का पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा मामला बालाघाट और पांढुर्णा जिलों से जुड़ा हुआ है। आरोप था कि सरकारी परिवहन दस्तावेजों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच 44 ट्रकों में भरकर करीब 16,500 क्विंटल चावल पांढुर्णा जिले के सौंसर स्थित एथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया था। दस्तावेजों में यह माल फैक्ट्री तक पहुंचना दर्ज कर दिया गया था, लेकिन जब जमीनी स्तर पर वास्तविक स्टॉक और कागजातों का भौतिक मिलान किया गया, तो दोनों में भारी अंतर पाया गया। इसी विसंगति के सामने आने के बाद शुरू में इसे करोड़ों रुपये का बड़ा घोटाला माना जा रहा था, जिस पर अब एफसीआई ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।

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