क्या बालिग हैं मोनालिसा? जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर के आरोपों के बीच हाई कोर्ट ने सुरक्षित किया जोड़ा, FIR पर रोक

महाकुंभ से चर्चा में आई मोनालिसा और उनके पति फरमान खान को इंदौर हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने पुलिस को दंडात्मक कार्रवाई न करने के आदेश दिए हैं। पढ़ें रिपोर्ट।

Jul 14, 2026 - 18:05
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क्या बालिग हैं मोनालिसा? जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर के आरोपों के बीच हाई कोर्ट ने सुरक्षित किया जोड़ा, FIR पर रोक

इंदौर। प्रयागराज महाकुंभ से अपनी शादी को लेकर देश भर में चर्चा में आई मोनालिसा और उनके पति फरमान खान को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से बहुत बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया है कि फिलहाल इस नवविवाहित जोड़े के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। इंदौर बेंच के जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने इस प्रेमी जोड़े की रिट याचिका पर यह अंतरिम आदेश पारित किया है और मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की है।

🚔 महेश्वर थाने में दर्ज केस: जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने दिया अंतरिम आदेश, वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने रखा पक्ष

हाई कोर्ट ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा है कि खरगोन जिले के महेश्वर थाने में दर्ज आपराधिक मामले में अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता दंपति के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं (फरमान खान और मोनालिसा) की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा और अधिवक्ता जेरी लोपेज ने पैरवी की और अपना पक्ष मजबूती से रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी और शासकीय अधिवक्ता सुनीत कपूर ने सरकारी पक्ष की दलीलें कोर्ट के सामने पेश कीं।

📄 जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर का आरोप: शादी के वक्त बालिग थीं मोनालिसा, परिवार पर दस्तावेज बदलने का आरोप

दरअसल, मोनालिसा और उनके पति फरमान खान ने महेश्वर नगर परिषद द्वारा मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र अचानक रद्द किए जाने और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) से सुरक्षा पाने के लिए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिका में पीड़ित जोड़े ने आरोप लगाया है कि लड़की के मायके पक्ष ने इस अंतर्धार्मिक विवाह का कड़ा विरोध किया है। परिवार ने एक सोची-समझी साजिश के तहत मोनालिसा के जन्म रिकॉर्ड में अवैध तरीके से छेड़छाड़ करवाई, ताकि शादी के समय उसे नाबालिग घोषित कर फरमान को फंसाया जा सके। याचिका के अनुसार, इस जोड़े ने 11 मार्च को केरल के एक मंदिर में पूरी सहमति से शादी की थी। लड़की की वास्तविक जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 है, जो महेश्वर नगर पंचायत द्वारा जारी मूल प्रमाण पत्र के साथ-साथ उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सभी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है।

📑 गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला: पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर पर अब 27 जुलाई को होगी सुनवाई

उल्लेखनीय है कि लड़की के परिवार की शिकायत पर महेश्वर पुलिस ने फरमान खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) (अपहरण), धारा 81 (धोखाधड़ी से शादी करना), धारा 83 (नाबालिग लड़की को बहलाना-फुसलाना), धारा 87 (अपहरण), बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इससे पहले पॉक्सो (POCSO) एक्ट मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद इस जोड़े ने हाई कोर्ट की शरण ली। अब हाई कोर्ट द्वारा दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाए जाने से इस जोड़े को बड़ी तात्कालिक राहत मिल गई है।

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