जबलपुर में स्कूल पर हिंदूवादी संगठनों का हमला; सफाई कर्मियों को नौकरी से निकालने पर मचा भारी बवाल
जबलपुर के माढोताल में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर एक निजी स्कूल पर उग्र प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। सफाई कर्मियों ने नौकरी से हटाने का आरोप लगाया है। जांच जारी।
जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में एक बार फिर धर्म परिवर्तन का आरोप लगाकर एक निजी स्कूल पर हिंदूवादी संगठनों के उग्र कार्यकर्ताओं द्वारा हमला करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान स्कूल परिसर में जमकर पथराव किया गया, जिससे स्कूल की खिड़कियों और मुख्य दरवाजों के शीशे पूरी तरह टूट गए। घटना के समय मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात था, लेकिन उग्र प्रदर्शनकारियों के सामने पुलिस पूरी तरह असहाय नजर आई। प्रदर्शनकारी जबरन स्कूल के भीतर घुसने का प्रयास कर रहे थे। जब पुलिस ने उन्हें मुख्य द्वार पर रोकने की कोशिश की, तो दूसरी तरफ से प्रदर्शन में शामिल कुछ महिलाओं ने स्कूल पर बड़े-बड़े पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।
इस पूरे विवाद की शुरुआत स्कूल के पूर्व सफाई कर्मचारियों के आरोपों के बाद हुई। पीड़ित सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा उन पर लंबे समय से धर्म परिवर्तन करने का मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। सफाई कर्मियों का कहना है, "जब हमने उनकी बात नहीं मानी और धर्म परिवर्तन करने से साफ मना कर दिया, तो हमें बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से बाहर निकाल दिया गया।" नौकरी से निकाले जाने के बाद पीड़ित सफाई कर्मियों ने इसकी लिखित सूचना विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के पदाधिकारियों को दी। इसके बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता दोपहर करीब 12 बजे भारी संख्या में स्कूल के बाहर जमा हो गए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ उग्र नारेबाजी शुरू कर दी।
तनाव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीम भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। हालांकि, आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को स्कूल के मुख्य गेट के बाहर रोकने के बजाय उन्हें परिसर के अंदर तक आने की अनुमति दे दी। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पाद मचाया। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने पत्थरबाजी कर स्कूल के मुख्य द्वार और खिड़कियों के कांच फोड़ दिए और खिड़कियों के पल्ले तक उखाड़ फेंके। जब स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने उग्र भीड़ को अंदर जाने से रोका, तो प्रदर्शनकारी पुलिस कर्मियों से ही भिड़ गए और उनके बीच तीखी झड़प हुई।
पीड़ित सफाई कर्मचारी राकेश कुमार ने बताया कि वह बीते 11 वर्षों से इस स्कूल में सेवा दे रहा था, लेकिन 3 महीने पहले उसे महज दो महीने का वेतन देकर अचानक निकाल दिया गया। राकेश का सीधा आरोप है कि स्कूल के फादर उस पर चर्च जाने और ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे। उसके साथ तीन अन्य कर्मचारियों को भी इसी वजह से निकाला गया है। बजरंग दल के नेता राहुल बर्मन ने कहा कि यहां नौकरी की आड़ में धर्मांतरण का खेल चल रहा था, जिसके विरोध में यह प्रदर्शन किया गया है।
दूसरी ओर, माढोताल क्षेत्र के सीएसपी (CSP) भगत सिंह गोठोरिया ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने एक निजी स्कूल में धर्मांतरण को लेकर हंगामा और तोड़फोड़ की है, जिसकी पुलिस हर पहलू से सूक्ष्म जांच कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि प्रदर्शनकारियों को गेट पर ही क्यों नहीं रोका गया, तो उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकेगा। इस बीच स्कूल के फादर सोमी जेकब का मोबाइल बंद मिला, लेकिन स्कूल से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल में हर कर्मचारी का 10 महीने का कॉन्ट्रैक्ट होता है। काम संतोषजनक न होने पर अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया जाता। हाल ही में नौकरी से हटाए जाने के बाद कुछ लोग दुर्भावना के तहत धर्मांतरण के झूठे आरोप लगा रहे हैं।
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