उज्जैन के त्रिवेणी संग्रहालय में सजी 400 साल पुराने दीपकों की 'अभ्यर्धना' प्रदर्शनी; देखें दुर्लभ संग्रह
उज्जैन के त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय में 'अभ्यर्धना' प्रदर्शनी के तहत 400 साल पुराने दुर्लभ व पारंपरिक दीपकों और शाही चिमनियों को प्रदर्शित किया गया है।
उज्जैन। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी उज्जैन के जयसिंहपुरा स्थित त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय में इतिहास और कला प्रेमियों के लिए एक बेहद खूबसूरत प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस विशेष प्रदर्शनी को 'अभ्यर्धना' नाम दिया गया है, जिसमें 200 से अधिक पारंपरिक और दुर्लभ दीपकों को प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें देश के विभिन्न राज्यों से ऐतिहासिक महत्व के दीपकों को एकत्रित किया गया है, जिनमें से कुछ दीपक तो 300 से 400 वर्ष पुराने ऐतिहासिक काल के हैं।
🏛️ अनूठा संग्रह: मंदिरों और शुभ कार्यों में प्रयुक्त होने वाले दीपकों का संकलन, पर्यटकों के लिए बना आकर्षण का केंद्र
त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी आदित्य चौरसिया ने इस प्रदर्शनी के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया, "संग्रहालय का यह प्रयास रहता है कि समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। इसी श्रृंखला में वर्ष 2023 से इस 'अभ्यर्धना' प्रदर्शनी की शुरुआत की गई थी, जिसे अब और समृद्ध किया गया है। यहाँ मुख्य रूप से उन दीपकों का संग्रह किया गया है जिनका उपयोग प्राचीन समय से लेकर आज तक मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और विभिन्न मांगलिक अवसरों पर किया जाता रहा है। इन सभी दीपकों की बनावट, उनका आकार और उनकी नक्काशी की डिजाइन एक-दूसरे से काफी अलग और अनूठी है।"
🗺️ विभिन्न प्रदेशों से कलेक्शन: दक्षिण भारत से लेकर मराठा काल तक के दीपकों की अनूठी बनावट और मयूर आकृतियां
संग्रहालय प्रबंधन के अनुसार, इस प्रदर्शनी में रखे गए दीपकों को दक्षिण भारत के राज्यों, मध्य प्रदेश के पारंपरिक अंचलों और हिमाचल प्रदेश सहित देश के कई सुदूर हिस्सों से इकठ्ठा किया गया है। कला प्रेमी यहाँ 300 से लेकर 400 वर्ष पुराने दीपकों को साक्षात देख सकते हैं। इस संग्रह में मराठा साम्राज्य (मराठा काल) से जुड़े कुछ अत्यंत भव्य और कलात्मक दीपक भी शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से मयूर (मोर) की सुंदर आकृति वाले दीपक और विशिष्ट कलात्मक आधार वाले दीपक आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं। यहाँ रखे गए पुराने कलेक्शन में कई ऐसे दुर्लभ प्रकार के यूनिक दीपक भी हैं, जो वर्तमान आधुनिक युग में पूरी तरह चलन से बाहर हो चुके हैं।
🏮 शाही चिमनियों का प्रदर्शन: राजमहलों को रोशन करने वाली प्राचीन चिमनियां और शाही लालटेन भी शामिल
आदित्य चौरसिया ने आगे बताया कि इस प्रदर्शनी में केवल मिट्टी या धातुओं के पारंपरिक दीपक ही नहीं, बल्कि प्राचीन काल की दुर्लभ चिमनियों और लालटेनों को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। कांच और धातु के संयोजन से बनी इन विशिष्ट चिमनियों का उपयोग पुराने समय में साधारण घरों में नहीं, बल्कि बड़े-बड़े राजप्रसादों, भव्य राजमहलों और शासकों (राजा-महाराजाओं) के निवास स्थानों पर रात्रि के समय रोशनी करने के लिए किया जाता था। इतिहास को अपने भीतर समेटे यह प्रदर्शनी उज्जैन आने वाले पर्यटकों के लिए ज्ञान और कौतूहल का एक शानदार केंद्र बनी हुई है।
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