'खेत का रास्ता खुलवाओ या उड़ने को हेलीकॉप्टर दो'; नीमच जनसुनवाई में किसान ने तंज कसते हुए की बड़ी मांग
नीमच में खेत का रास्ता बंद होने से परेशान किसान गले में खिलौने वाले हेलीकॉप्टर की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंचा। उसने प्रशासन से अनोखी मांग की। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
नीमच। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान एक बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। यहाँ एक पीड़ित किसान अपने गले में खिलौने वाले 6 प्लास्टिक के हेलीकॉप्टर की माला पहनकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने न्याय की गुहार लगाने पहुंचा। किसान का यह नायाब और अनोखा प्रदर्शन पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में भारी चर्चा का विषय बन गया। वहां मौजूद हर अधिकारी, कर्मचारी और आम शख्स इस दृश्य को देखने के लिए अपनी जगह पर रुक गया। किसान की मांग है कि चूंकि प्रशासन उसे उसके खेत तक जाने का रास्ता नहीं दिला पा रहा है, इसलिए उसे खेत पर आने-जाने के लिए सरकारी खर्च पर एक हेलीकॉप्टर मुहैया कराया जाए।
🚫 कांटों के तारों से बंद किया रास्ता: ग्राम पालसोड़ा के रसूखदारों पर रास्ता ब्लॉक करने का आरोप, ठप हुई खेती
यह पूरा मामला जीरन तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पालसोड़ा का है। पीड़ित किसान रमेशचंद्र शर्मा ने आपबीती सुनाते हुए बताया, "उनके खेत पर जाने का बरसों पुराना पारंपरिक रास्ता गांव के ही कुछ प्रभावशाली और रसूखदार लोगों ने कांटों के तार खींचकर पूरी तरह से बंद कर दिया है। रास्ता बंद हो जाने के कारण मेरी खेती-किसानी का सारा काम पूरी तरह ठप हो गया है। हम अपने ही स्वामित्व वाले खेत पर फसल बोने या उसकी देखभाल करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं। रसूखदारों के आगे स्थानीय प्रशासन भी लाचार नजर आ रहा है।"
🛸 खेत पर जाने के लिए हेलीकॉप्टर की मांग: किसान ने तंज कसते हुए कहा— 'जब रास्ता नहीं खुलवा सकते, तो उड़ने का इंतजाम करो'
प्रशासनिक ढर्रे पर करारा तंज कसते हुए पीड़ित किसान रमेशचंद्र शर्मा ने कहा, "जब स्थानीय राजस्व और पुलिस प्रशासन मिलकर मेरी पैतृक जमीन तक जाने का एक छोटा सा रास्ता नहीं खुलवा पा रहा है, तो अब मेरे पास उड़कर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसलिए सरकार मुझे उड़कर खेत जाने के लिए हेलीकॉप्टर ही दिला दे, ताकि मैं हवाई मार्ग से अपने खेत पर पहुंच सकूं और अपनी आजीविका चला सकूं।" इसी प्रतीकात्मक मांग को लेकर वे गले में प्लास्टिक के खिलौने वाले हेलीकॉप्टरों की माला टांगकर जनसुनवाई में आए थे ताकि सोए हुए प्रशासन को जगाया जा सके।
⚖️ हाई कोर्ट के आदेश की भी अवहेलना: 10 जुलाई को होना था मौका मुआयना, विपक्षी ने पहले ही कर दी पक्की फेंसिंग
किसान द्वारा सौंपे गए आवेदन के अनुसार, इस रास्ते के विवाद को लेकर पीड़ित पक्ष को उच्च न्यायालय (High Court) से भी अपने पक्ष में स्पष्ट कानूनी आदेश मिल चुका है। कोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन कराने के लिए जिला प्रशासन ने एक संयुक्त दल भी गठित किया था, जिसे आगामी 10 जुलाई को मौके पर जाकर निरीक्षण करना था और रास्ता बहाल करवाना था। लेकिन किसान का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही, 7 जुलाई को विपक्षी अमृतलाल पाटीदार, प्रदीप पाटीदार और तुलसीबाई ने अपने धनबल और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वहां दोबारा पक्की तार फेंसिंग कर दी और रास्ते को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया।
जब इस अवैध फेंसिंग की शिकायत दोबारा स्थानीय राजस्व अमले से की गई, तो वहां कोई सुनवाई नहीं हुई। हालांकि, आज के इस अनोखे और ध्यान आकर्षित करने वाले प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट के जिम्मेदार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित किसान से उसका आवेदन ले लिया है। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की सूक्ष्म जांच कर कानून के दायरे में उचित और सख्त वैधानिक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है।
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